
काशीपुर। एलडी भट्ट राजकीय अस्पताल में निर्धारित बेडों के अनुपात में मरीजों की बढ़ती संख्या अस्पताल प्रबंधकों के लिए समस्या बन चुकी है। इसी के चलते टीबी के संभावित मरीजों को बर्न यूनिट में रखा गया है। यह अन्य मरीजों के लिए घातक है।
अस्पताल के सभी मेल-फिमेल वार्ड भरे चल रहे हैं। एक गलियारों को बंद कर उसमें भी बेड लगाए गए हैं। ऐसे में बर्न यूनिट में टीबी के दो मरीजों को रखा गया है। अगर कोई झुलसा हुआ मरीज आ गया तो उसे रखने की समस्या खड़ी हो गई है। वैसे भी टीबी के मरीजों को अस्पताल में भर्ती करने से रोगी की सांस में निकलने वाले माइको बैक्ट्रीरिया से बीमारी दूसरे व्यक्ति में संक्रमण होने का गंभीर खतरा रहता है। इसी कारण टीबी के अलग अस्पताल या वार्ड होते हैं। बर्न यूनिट में भर्ती कुमारी नीरज (13) निवासी बांसियोंवाला मंदिर के परिजनों ने बताया कि उनका मरीज तीन दिन से भर्ती है। उसकी सांस फूल रही है। लोग टीबी बता रहे हैं। उपचार से लाभ नहीं हो रहा है। इसी कमरे में लोहिया पुल निवासी महबूब (55) भी भर्ती हैं उसने बताया कि उसको सांस फूलने की शिकायत है। शायद टीबी है। उपचार से कोई लाभ नहीं हो रहा है।
अस्पताल अधीक्षक डा. केके शर्मा ने बताया कि अस्पताल में 66 बेड स्वीकृत हैं। जबकि इस समय 87 रोगी भर्ती हैं। उन्होंने बताया कि अस्पताल में बर्न वार्ड नहीं है। केवल बर्न यूनिट है। इसलिए 40 प्रतिशत से अधिक झुलसे रोगियों को भर्ती नहीं किया जाता है। इस कारण खाली रहने पर अन्य रोगी रखे जाते हैं।
