
भुंतर (कुल्लू)। प्रदेश भर के करीब तीन हजार टैट पास भाषा अध्यापकों का भविष्य शिक्षा विभाग की फाइलों में कैद होकर रह गया है। वर्ष 2011 में सबसे पहले भाषा अध्यापकों के लिए टैट की परीक्षा आयोजित की गई थी लेकिन सीधी और बैच वाइज भर्ती में आरएंडपी रूल्स बाधा बन गए। हिमाचल शिक्षा क्रांति मंच के प्रदेशाध्यक्ष विजय हीर की याचिका पर कार्रवाई करते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय से शिक्षा सचिव को भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के आदेश पारित हुए थे। लेकिन पांच माह बाद भी मामला फाइलों में बंद पड़ा है।
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के निर्देशों पर भी शिक्षा विभाग ने अमल नहीं किया। संपर्क करने पर कोई भी अधिकारी इस मुद्दे पर बात नहीं करना चाहता। लिहाजा, अब भाषा अध्यापकों ने आंदोलन की रूपरेखा तैयार करनी शुरू कर दी है। दो सालों से दर-दर की ठोकरें खाने के बाद भाषा अध्यापकों में विभाग के प्रति रोष है। भाषा अध्यापकों ने शिक्षा विभाग से मांग की है कि अगर समय रहते भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं की तो फिर टैट का प्रमाणपत्र विभाग को लौटा देंगे।
कुल्लू जिला भाषा अध्यापक महासंघ की प्रदेशाध्यक्ष राजकुमारी ने कहा कि विभाग की बेरुखी के चलते बेरोजगारों का भविष्य संकट में है। उन्होंने बताया कि इस पर महासंघ जल्द ही बड़ा आंदोलन चलाएगा। कुल्लू जिला की अध्यक्षा भावना राणा ने कहा कि शिक्षकों की कमी से प्रदेशभर के स्कूलों में हिंदी भाषा का स्तर गिरता जा रहा है लेकिन सरकार को इसकी चिंता नहीं है।
