हाथोंहाथ बिक रहा कुल्लू का कच्चा सेब

भल्याणी (कुल्लू)। फलों की घाटी कुल्लू के बगीचे इन दिनों फलों से लकदक हैं। हालांकि सेब का दाना अभी अपना पूरा आकार नहीं ले पाया है। बावजूद इसके विपणन बोर्ड की स्थानीय मंडियों में सेब की फसल हाथोंहाथ बिकना शुरू हो गई है। स्थानीय मंडियों में कुल्लू का सेब पचास रुपये किलो के हिसाब से बिक रहा है। इससे बागवान गदगद हैं। बागवानों को सीजन में सेब के दामों में और उछाल आने की उम्मीद है।
बीते सालों में कभी मौसम के कहर तथा कभी अनुकूल वातावरण न रहने से जिला में सेब का उत्पादन का लुढ़क गया था। इस बार मौसम अच्छा रहने से जिला में दो लाख चौबीस हजार मीट्रिक टन सेब का उत्पादन की उम्मीद है।
बाह्य राज्यों के सेब के व्यापारियों ने स्थानीय मंडियों में दस्तक देनी शुरू कर दी है। व्यापारी आधे कच्चे माल को हाथोंहाथ ले रहे हैं। साल 2008 में जिला में 85543 मीट्रिक टन, 2009 में 77272 मीट्रिक टन, 2010 में 175000, 2011 में 58540, 2012 में 163031 मीट्रिक टन सेब का उत्पादन हुआ था। इस बार सेब के बगीचे सोना उगल रहे हैं। जिला में सेब की बंपर पैदावार के चलते बागवानों को तगड़ी कमाई की उम्मीद है।
बागवानी उपनिदेशक बीसी राणा ने बताया कि कुल्लू के बगीचों में अब की बार कुल मिलाकर दो लाख चौबीस हजार मीट्रिक टन सेब उगा है। वर्षों से आर्थिक तंगी झेल रहे बागवान इस बार अच्छे कारोबार की उम्मीद में हैं। कुल्लू एवं लाहौल-स्पीति कृषि विपणन बोर्ड के सचिव प्रकाश कश्यप ने बताया कि वीरवार को कुल्लू, भुंतर, बंदरोल, पतलीकूहल और खेगसू सब्जी मंडियों में 24 सौ क्रेटों की बिक्री हुई है। सेब 50 रुपये प्रति किलो के हिसाब से हाथोंहाथ बिक रहा है।

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