
नई दिल्ली। प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की मानहानि मामले में स्वयं को प्रथमदृष्टया दोषी ठहराए जाने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। अदालत ने दिल्ली सरकार व शीला दीक्षित को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
न्यायमूर्ति जे.आर. मिड्डा ने दोनों पक्षों को स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि क्यों न याचिका विचारार्थ स्वीकार कर ली जाए। अदालत ने विजेंद्र गुप्ता के उस तर्क को खारिज कर दिया, जिसमें ट्रायल कोर्ट में विचाराधीन मानहानि की सुनवाई पर रोक लगाने का आग्रह किया गया था। अदालत ने मामले की सुनवाई 5 अगस्त तय की है।
ट्रायल कोर्ट ने एक जुलाई को दिए फैसले में विजेंद्र गुप्ता को मुख्यमंत्री की मानहानि के मामले में प्रथमदृष्टया दोषी ठहराया था। अदालत ने कहा था कि गुप्ता के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त साक्ष्य हैं। उन्होंने कहा हर व्यक्ति की प्रतिष्ठा अहम होती है और विजेंद्र गुप्ता ने जिस प्रकार याची शीला दीक्षित के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया है, वह सरासर उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने की श्रेणी में आता है। अदालत ने कहा विजेंद्र गुप्ता ने शीला दीक्षित के प्रति धोखेबाज व विलेन की भाषा का प्रयोग किया है, यह उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने के लिए काफी है।
अदालत ने मामले की सुनवाई 22 जुलाई तय की थी यानी अब निचली अदालत में तय तिथि पर सुनवाई होगी।
गुप्ता के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि उनकी मुवक्किला के खिलाफ ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जिससे साबित हो कि उन्होंने मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की मानहानि की। उन्होंने कहा पूरा मामला समाचार पत्रों में छपी खबरों पर आधारित है। ऐसे में उनके मुवक्किल के खिलाफ निर्धारित अभियोग संबंधी फैसले को रद्द किया जाए।
