
आनी (कुल्लू)। क्षेत्र का सबसे बड़ा सेब बहुल इलाका होने के बावजूद यहां के बागवान कब तक सेब को पीठ पर ढोते रहेंगे। क्षेत्र की करीब तीन पंचायताें की जनता अभी तक सड़क सुविधा से नहीं जुड़ सकी है। इसके चलते बागवानों को भारी आर्थिक नुकसान पहुंच रहा है। हालांकि, बागवानों को हर वर्ष आश्वासन दिए जाते हैं कि अगले सेब सीजन तक सड़क बनकर तैयार हो जाएगी, लेकिन तीस वर्ष से सड़क नहीं बन पाई है। इससे क्षेत्र के बागबानों में भारी रोष है।
बागवानों का कहना है कि सड़क के लिए अपनी जमीन तक दे रखी है। इससे लाखों के सेब देने वाले पौधे तक काट दिए गए हैं। 1977 में शांताकुमार ने आनी-बश्ता सड़क की घोषणा की थी। 1977 के बाद कम बजट के अभाव में इस सड़क का निर्माण कार्य कछुआ चाल के साथ शुरू कर दिया गया। 2004-05 में सड़क को प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना में डाला गया। लेकिन, कभी ठेकेदार तो कभी विभाग की सुस्ती के कारण काम पूरा नहीं हो सका। क्षेत्र के बागवान डोलीराम, ताबेराम, ओम प्रकाश, जय सिंह आदि का कहना है कि उनके क्षेत्र में करोड़ों के सेब का कारोबार होता है, लेकिन सेब को मंडियों तक पहुंचाने के लिए आज तक सड़क सुविधा नहीं मिल पाई है। बागवानों का कहना है कि सड़क न होने के कारण पूरी कमाई घोड़े खच्चर और सेब पीठ पर मंडियों तक पहुंचाने वाले मजदूर पर खत्म हो जाती है। इसके बारे में लोनिवि के एक्सईएन अभियंता निरमंड अनिल शर्मा का कहना है कि जो ठेकेदार कार्य कर रहा था, काम में देरी के चलते उसका टेंडर रद कर दिया गया है। शेष कार्य की फिर सेडीपीआर बनाकर टेंडर किए जाएंगे।
