
कुल्लू। सुबह-सवेरे कई किलोमीटर की पैदल यात्रा और फिर उसके बाद निजी तथा सरकारी बसों में रोजाना भारी-भरकम किराया देकर स्कूल पहुंचना। कुछ ऐसी ही कहानी थी कुल्लू जिले के कई दुर्गम गांवों के बच्चों की। इन गांवों के गरीब मां-बाप अपने बच्चों को विशेषकर बेटियों की बेहतर शिक्षा की तो कल्पना भी नहीं कर सकते थे लेकिन प्रदेश सरकार की मुफ्त बस यात्रा सुविधा ने इनके सपनों को साकार कर दिया।
अब इन बच्चों को स्कूल तक पहुंचने में कोई दिक्कत नहीं हो रही। विशेषकर गरीब परिवारों के बच्चों और छात्राओं के लिए तो यह योजना एक वरदान साबित हुई है। इस कल्याणकारी योजना का असर कई दुर्गम गांवों के बच्चों तथा उनके अभिभावकों में साफ देखने को मिल रहा है। अभिभावक भी अपने बच्चों विशेषकर बेटियों को बेझिझक दूर-दूर स्थित स्कूलों में भेजने से गुरेज नहीं कर रहे।
गड़सा घाटी के दुर्गम गांव सीस के वीरेंद्र सिंह, डिंपल सिंह, ओम प्रकाश, कला देवी, डोले राम, गांव नजां के पवन कुमार, मोहन सिंह, किरणा, प्रेम कुमार और अन्य बच्चे कई किलोमीटर की पैदल तथा बस यात्रा के बाद सीनियर सेकेंडरी स्कूल गड़सा में पढ़ने आते हैं। इनका कहना है कि प्रदेश सरकार ने मुफ्त बस यात्रा योजना आरंभ करके उनकी कई दिक्कतें दूर कर दी हैं। बंजार उपमंडल के दुर्गम गांव चेड़ा के विद्यार्थी ऐन सिंह, भूपेंद्र सिंह, धीरज कुमार और किरण कुमारी भी इस योजना से गदगद हैं। सीनियर सेकेंडरी स्कूल बजौरा की विद्यार्थी बबीता ठाकुर, नम्रता शर्मा, ब्वायज सीनियर सेकेंडरी स्कूल ढालपुर के माणिक, हरीश, अनिल कुमार और अन्य विद्यार्थियों का कहना है कि प्रदेश सरकार ने उनकी राह आसान कर दी है। ब्वायज सीनियर सेकेंडरी स्कूल ढालपुर के प्रधानाचार्य हेमराज शर्मा, सीनियर सेकेंडरी स्कूल बजौरा के प्रधानाचार्य रहमत अली और अन्य शिक्षाविद भी मानते हैं कि मुफ्त बस यात्रा की सुविधा से शिक्षा के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित होंगे।
