
नई दिल्ली। उपराज्यपाल पद से तेजेंद्र खन्ना की विदाई के बाद तीनों नगर निगम के अधिकारियों ने उनके वे फैसले और आदेश पलटने शुरू कर दिए हैं जो उन्हें रास नहीं आ रहे हैं। इस कड़ी में सबसे पहले पूर्व सैनिक अधिकारी को नगर निगम से विदा कर दिया गया। उस अधिकारी को तेजेंद्र खन्ना ने करीब साढ़े पांच साल पहने नगर निगम में उपायुक्त बनाया था। इसके बाद नगर निगम के अधिकारियों ने अनधिकृत कालोनियों से प्रॉपर्टी टैक्स वसूलने का निर्णय लिया है। जबकि तेजेंद्र खन्ना ने इन कालोनियों के लोगों से प्रॉपर्टी टैक्स लेने से मना कर दिया था।
राजधानी में बसी 1639 अनधिकृत कालोनियों एवं हाल में दिल्ली सरकार द्वारा नियमित की गईं कालोनियों के लोग प्रॉपर्टी टैक्स देने के लिए तैयार हो जाएं, क्योंकि तीनों नगर निगम ने उनसे प्रॉपर्टी टैक्स लेने की कवायद शुरू कर दी है। जल्द ही इस संबंध में पब्लिक नोटिस जारी किया जाएगा। डीएमसी एक्ट के प्रावधान के तहत टैक्स लेने की तैयारी शुरू की गई है। एक नगर निगम के प्रॉपर्टी टैक्स विभाग के प्रमुख ने बताया कि, तेजेंद्र खन्ना ने करीब तीन वर्ष पहले मौखिक तौर पर टैक्स लेने की कवायद बंद करने के आदेश दिए थे, लेकिन अब पुन: टैक्स वसूलने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके अलावा नगर निगम में उन अधिकारियों का कद कम होने की संभावना है जो तेजेंद्र खन्ना के हस्तक्षेप के चलते काफी पॉवरफुल बने हुए थे। दूसरी ओर ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों में अतिरिक्त एफएआर के लिए परिसर बनाने की इजाजत देने में तीनों नगर निगम तेजेंद्र खन्ना के आदेश को भी रद्दी की टोकरी में डालने में जुट गई है। उन्होंने अतिरिक्त एफएआर के लिए वर्तमान ब्लाक में निर्माण करने से मना कर दिया। नगर निगम अधिकारियों ने फार्म हाउस नियमित करने की नीति में भी संशोधन की तैयारी की है। वे नए उपराज्यपाल से आग्रह करेंगे कि फार्म हाउस नियमित करने का अधिकार नगर निगम के पास ही रहे। ऐसा नहीं होने पर उन्हें काफी आर्थिक घाटा होगा। गौरतलब है कि, तेजेंद्र खन्ना ने फार्म हाउस नियमित करने का अधिकार डीडीए को देने के आदेश दिए थे।
