
देहरादून: उत्तराखंड में आई आपदा ने जहां सब कुछ तबाह हो गया वहीं कई परिवार अपने परिवारजनों से हमेशा के लिए दूर हो गए। कुछ सप्ताह पूर्व उत्तराखंड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने कहा था कि उत्तराखंड में जो लोग लापता हुए हैं अगर वह 15 जुलाई तक न मिले तो उन्हें मृत समझा जाएगा। आज 15 जुलाई है और सरकार ने पांच हजार से ज्यादा लोगों के लापता होने की पुष्टि की थी। सूत्रों के अनुसार अभी तक इन लापता लोगों के बारे में कुछ पता नहीं चल पाया है इसलिए सरकार अब इन लापता लोगों को मृत मानकर इनके परिजनों को मुआवज़ा देना शुरू कर देगी।
सूत्रों के अनुसार मरने वालों में उत्तर प्रदेश के सबसे अधिक लोग हैं और मध्य प्रदेश व मरने वालों में उत्तराखंड के लोगों की भी बड़ी तादाद है। मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने कहा कि जो लोग लापता हैं उन्हें हम स्थाई रूप से लापता मानकर उनके परिजनों को मुआवज़ा तो दे देंगे लेकिन राज्य सरकार की तरफ से उनको खोजने का अभियान जारी रखा जाएगा। बहुगुणा ने कहा कि जो भी हमारे पास फोटो हैं उसके आधार पर अस्पतालों और दूसरी जगहों में उन्हें खोजते रहेंगे ताकि कोई भटक न गया हो।
बहुगुणा ने कहा कि सरकार ही लोगों को हलफ़नामा बनाकर देगी ताकि लोगों को तत्काल मुआवज़ा मिल जाए। बहुगुणा ने बताया कि मृतक और लापता लोगों के परिजनों को प्रधानमंत्री राहत कोष से दो लाख, राष्ट्रीय आपदा निधि से डेढ़ लाख रुपए दिए जाएंगे। वहीं उत्तराखंड सरकार प्रदेश के पीड़ितों को अलग से डेढ़ लाख रुपए देगी। भारतीय दंड संहिता के तहत 7 वर्ष तक लापता रहने के बाद ही किसी व्यक्ति को कानूनन मृत माना जाता है लेकिन उत्तराखण्ड सरकार ने15 जुलाई के बाद ही लापता लोगों को मृतक की श्रेणी में मान लेने का निर्णय पिछले महीने लिया था।
लेकिन एक बात अटपटी लगी जब सीएम ने कहा कि परिजनों को 15 जुलाई के बाद मुआवज़ा तो दे दिया जाएगा लेकिन भविष्य में अगर कोई जीवित लौटता है तो मुआवजे की राशि लौटानी होगी।
