ऐसे बचाएं बागवानी को ‘रूट बोरर’ से

रोहड़ू। उद्यान विभाग ने बागवानों को रूट बोरर नामक कीट को लेकर जागरूक किया। विभाग ने
खंगटेडी पंचायत के पगास तथा खदराला गांव में जागरूकता शिविर लगा रखे थे। इस दौरान उद्यान विकास अधिकारी आग्रदास ने बताया कि आजकल जड़ छेद भृंग अंडे देने शुरू कर देते हैं। उन्होंने कहा कि एक कीट दो सौ तक अंडे नर्म जमीन या गोबर के बीच तैयार करता है। उसके बाद वह विकसित होने पर जमीन में घुस कर पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंचाता है। एक जड़ छेदक कीट की उम्र तीन साल तक होती है। उन्होंने कहा कि इसकी रोकथाम के लिए बागवानों को घर के बाहर या बगीचे में रात के समय बड़े बर्तन या ड्रम में पानी भर कर उसमें मिट्टी तेल की कुछ मात्रा डालनी चाहिए। पानी से भरे बर्तन के ऊपर रात को लाइट जला कर रखें। बिजली के बल्ब से टकरा कर भृंग पानी में गिर जाएगा। शोध में सामने आया है कि इस तरीके से 80 प्रतिशत तक रूट बोरर से छुटकारा पाया जा सकता है। उन्होंने शिविर के दौरान बागवानों को रूट बोरर मादा भृंग के नमूने भी दिखाए।
इस दौरान उन्होंने बागवानों को तना तथा जड़ सड़न रोग की भी विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि खंगटेडी पंचायत तथा आसपास के क्षेत्र में तना सड़न रोग के अधिक लक्षण सामने आए हैं। जानकारी के अभाव में बागवान तने सड़न के स्थान पर जड़ सड़न का उपचार कर रहे हैं। जड़ सड़न के लिए बागवान सौ ग्राम बेविस्ंिटन सौ लीटर पानी में मिला कर पंद्रह दिन के अंतराल में जड़ों में डालें। शिविर में खंगटेडी पंचायत की प्रधान आशा देवी, उप प्रधान विनोद कुमार, वार्ड सदस्य नीटू तथा पंचायत के सभी बागवान उपस्थित थे।

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