
ऊना। पोलियां बीत स्थित डेरे में महंत सिंगारा राम के कत्ल की वारदात में स्टेट सीआईडी उलझ गई है। करीब एक वर्ष बीत जाने के बाद भी स्टेट सीआईडी के हाथ खाली हैं। अब यह मामला डीआईजी सतवंत अटवाल को सौंपा गया है। पुलिस और स्टेट सीआईडी के हाथ खाली रहने से ऊना के अन्य डेरों में भी असुरक्षा का माहौल है। मई 2012 में महंत सिंगारा राम का बेरहमी से कत्ल करने के बाद लाश संदूक में रजाइयों के ढेर के बीच मे छिपाई हुई थी। इस केस की जांच पहले ऊना पुलिस ने की। मामले में पुलिस ने पंजाब की एक महिला और एक अन्य डेरे के महंत को गिरफ्तार किया। नंगल संलागड़ी की एक साध्वी को भी मामले में नामजद किया गया था। जब पुलिस साध्वी से पूछताछ करने के लिए नंगल संलागड़ी की ओर जा रही थी तो खबर मिली कि साध्वी ने आत्महत्या कर ली है। पुलिस को साध्वी के जरिए कुछ ठोस साक्ष्य हाथ लगने की उम्मीद थी, लेकिन साध्वी द्वारा सुसाइड किए जाने से पुलिस की जांच को झटका लगा। हालांकि मामले में गिरफ्तार किए पंजाब के डेरे के महंत और अन्य महिला ऊना में पुलिस रिमांड पर रहने के बाद न्यायिक हिरासत में भी रहे। अब दोनों जमानत पर रिहा हो गए हैं। नंगल संलागड़ी में साध्वी द्वारा आत्महत्या किए जाने के बाद केस की जांच स्टेट सीआईडी को सौंपी गई। शिमला से सीआईडी के डीएसपी ने टीम के साथ ऊना के कई दौरे किए, लेकिन हाथ कुछ भी नहीं लगा। स्टेट सीआईडी के एडीजी एसआर मरडी ने कहा कि यह मामला अब डीआईजी सतवंत अटवाल को सौंपा गया है। डीआईजी सीआईडी (साइबर क्राइम) सतवंत अटवाल ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है। क्राइम ब्रांच की भी मदद ली जा रही है। उन्होंने कहा कि फिलहाल इस केस में दोषियों के खिलाफ ठोस साक्ष्यों की तलाश है।
