
रोहड़ू। बागबानों ने आढ़तियों की मनमानी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बागवानों का कहना है कि मंडी में सेब बिक्री के बाद उन्हें समय पर भुगतान नहीं किया जाता है। पिछले साल के अभी तक बागवानों के आढ़तियों के पास करोड़ों रुपये फंसे हैं।
हिमालयन एप्पल ग्रोवर इंडिया के पदाधिकारी एवं जुब्बल क्षेत्र के प्रगतिशील बागवान बलवंत जस्टा, परविंद्र झौहटा, शिव कुमार शर्मा, विनीत सरजोल्टा, नरेश सिथटा, राजश्ेा धांटा सहित नरवीर सिथटा ने बताया कि पिछले साल सेब सीजन में सेब बेचने के बाद बागवानों के लाखों रुपये आढ़ती डकार चुके हैं। साल बीतने के बाद भी बागवानों को अपनी कमाई के लिए आढ़तियों के पास चक्कर काटने पड़ रहे हैं। उन्होंने सरकार से मांग की है कि आढ़ती को सेब बेचने का लाइसेंस देने से पहले उनकी बैंक गारंटी सरकार तय करे। कुछ लोग लाइसेंस लेकर करोड़ों रुपयों का सेब कारोबार कर रहे हैं। ऐसे अधिकांश आढ़तियों के पास कोई चल अचल संपत्ति अपने नाम नहीं है। सेब सीजन में बागवानों के रुपये एेंठने के बाद ऐसे लोगों से वसूली संभव नहीं है। पंचायत समिति सदस्य निखिल सारटा, एआईपीएल के पूर्व निदेशक सुंदर सिंह नैटा ने कहा मंडी में बागवानों को हर तरीके से लूटने की कोशिश होती है। मजदूरी के नाम पर बीस रुपये प्रति पेटी तक वसूल की जाती है। आढ़ती मजदूरों को मात्र चार पांच रुपये का भुगतान ही करते हैं। उन्होंने सरकार से मांग की है कि बागवानों को लूट खसोट से बचाने के लिए कड़े कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि यदि पहल नहीं की जाती है तो बागवानों को न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा।
