
भल्याणी (कुल्लू)। किसानों के खेतों के लिए नदी-नालों से पानी लिफ्ट करने के मकसद से कुल्लू में संचालित हिम ऊर्जा विभाग का पायलट प्रोजेक्ट चौपट हो गया है।
विभाग ने करीब छह वर्ष पूर्व जिलेभर के नदी-नालों में सौ हाइड्रम स्थापित किए थे। लेकिन यह संचालित होने से पूर्व ही नाकारा साबित हो गए। यही नहीं अधिकांश हाइड्रमोें को चोर भी उड़ा ले गए हैं।
करोड़ों रुपये खर्च कर स्थापित हाइड्रमों के इस तरह लड़खड़ा जाने से हिम ऊर्जा विभाग की कार्यप्रणाली की भी पोल खुल गई है। इनके रखरखाव का जिम्मा लेने से हिम ऊर्जा विभाग ने छह वर्ष पूर्व ही हाथ खड़े कर दिए थे। हिम ऊर्जा विभाग ने किसानों के खेतों को तर करने के मकसद से करीब छह वर्ष पूर्व ऊझी घाटी में 30 और आनी-निरमंड में 40 हाइड्रम स्थापित किए थे। इसके अलावा लगघाटी में 7, खराहल में 5, बंजार में 8 और मणिकर्ण 10 हाइड्रम स्थापित किए हैं। इनमें से 90 फीसदी हाइड्रम शुरू नहीं हो पाए। लोगों ने विभाग से प्रश्न किया है कि करोड़ों की लागत से नदी-नालों में जंक खा रहे यह हाइड्रम आखिर किस काम के हैं। लगघाटी के जय सिंह ने बताया कि घाटी में लगे अधिकतर हाइड्रमों को चोर उड़ा ले गए हैं। ऊझी के बालमुकुंद राणा, मणिकर्ण के जीत राम, हीरा लाल ने विभाग से इन हाइड्रमों को दुरुस्त करने की मांग की है।
जल्द रिपेयर किए जाएंगे हाइड्रम
हिम ऊर्जा विभाग के जिला प्रोजेक्ट ऑफिसर नारायण दत्त ने बताया कि इस पायलट प्रोजेक्ट के लिए पूर्व में रखरखाव तथा रिपेयरिंग के लिए धन की व्यवस्था नहीं थी। इसलिए इन्हें दुरुस्त नहीं किया जा सका। अब सरकार तथा विभाग ने इन्हें संचालित करने के लिए बजट की व्यवस्था कर दी है। विभाग हाइड्रमों को दुरुस्त कर इनके रखरखाव और रिपेयरिंग तथा चौकीदारी का जिम्मा पंचायतों के सुपुर्द करेगी। विभाग आगे से इनकी रिपेयर के लिए धन की व्यवस्था नहीं करवाएगा।
