
उत्तरकाशी। डुंडा प्रखंड का सौड़ गांव खतरे की जद में है। यहां भू-धसाव से कई आवासीय भवनों पर दरारें पड़ गई है। कुछ परिवार स्कूलों में तो कुछ उन्हीं असुरक्षित भवनों में रहने को मजबूर हैं। हालांकि एसडीएम गांव का निरीक्षण कर चुके हैं, लेकिन उन्हें अब तक सिर ढकने के लिए तिरपाल तक नहीं मिल पाए।
डुंडा विकासखंड के सौड़ गांव के 50 से अधिक भवन 16- 17 जून को हुई बारिश से भू-धसाव की जद में आ रखे हैं। यहां कई भवनों पर दरारें आ गई हैं। गांव में भू-धसाव की सूचना पर कुछ दिन पहले एसडीएम राजकुमार पांडे ने गांव पहुंचकर नुकसान का जायजा लिया था। उन्हाेंने ग्रामीणों को टेंट उपलब्ध कराने का भी आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक ग्रामीणाें को प्रशासन द्वारा कोई मदद नहीं मिल पाई। ग्राम प्रधान चंदन सिंह, विक्रम सिंह, राजेंद्र सिंह व सुंदर सिंह ने प्रशासन से गांव के विस्थापन की मांग की है। उन्होंने असुरक्षित भवनों में रह रहे परिवारों को भी शिफ्ट करने की मांग की है। दूसरी ओर भड़कोट के प्रधान मूर्तिराम ने बताया कि उनके गांव में आपदा से सिंचाई नहर और खेत बहे हैं। अनुसूचित जाति बस्ती ल्वारखा में भी खतरा बना हुआ है। उन्होंने प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की मांग की है।
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भू-धंसाव की सूचना पर मैंने स्वयं सौड़ गांव जाकर नुकसान का जायजा लिया। गांव में 50 मकान खतरे की जद में हैं। गांव के भू-गर्भीय सर्वे के लिए रिपोर्ट भेज दी गई। ग्रामीणों के लिए टेंट उपलब्ध कराने के लिए की मांग की गई है। – राजकुमार पांडेय, एसडीएम डुंडा
