
हल्द्वानी। प्रदेश में 125 स्कूल ऐसे हैं जो कि लंबे समय से जर्जर भवनों में चल रहे हैं। इनमें सर्वाधिक 45 स्कूल नैनीताल जिले में हैं जबकि कुमाऊं का ही दूसरा जिला अल्मोड़ा जर्जर भवनों के मामलों में दूसरे नंबर पर है। अल्मोड़ा जिले में 39 स्कूल जर्जर भवनों में चल रहे हैं। प्रदेश की राजधानी देहरादून जिले में जर्जर भवनों में संचालित स्कूलों की संख्या कम नहीं है। वहां ऐसे भवनों में संचालित स्कूल 22 हैं।
यह आंकड़े काफी चौंकाने वाले हैं। सूचना का अधिकार के तहत मांगी गई सूचना के अंतर्गत शिक्षा विभाग ने यह जानकारी दी है। समाजसेवी नवीन कपिल ने शिक्षा निदेशक से स्कूलों के संबंध में सूचना मांगी थी। शिक्षा विभाग से मिले आंकड़ों के मुताबिक नैनीताल जिले में राजकीय इंटर कालेज बगड़, मंगोली, चांफी, रामगढ़, पटवाडांगर, दौलतपुर, गुनियालेख, बेतालघाट, पहाड़पानी, कठघरिया, हरिपुर जमनसिंह, लामाचौड़, कोटाबाग, ओखलकांडा, राजकीय कन्या इंटर कालेज कोटाबाग, राजकीय इंटर कालेज जोस्यूड़ा, पैटना, राजकीय कन्या इंटर कालेज हल्द्वानी, राजकीय इंटर कालेज रामनगर, कालाढूंगी, भीमताल, करनपुर, मालधनचौड़ और डायट भीमताल जर्जर भवनों में संचालित किए जा रहे हैं। इसी तरह रामनगर ब्लाक में जर्जर भवनों में प्राइमरी स्कूल ढेला, लेटी चोपड़ा, क्यारी, बच्चीनगर, तेलीपुरा, दक्षिणी पाटकोट, लक्षमपुर ठेरी, पाटकोट, मोतीपुर छोई, गोपालनगर नंबर छह, गौतम नगर, मालधनचौड़, भलौन, पीपलसाना, नंदनपुर खेमपुर और शिव लालपुर स्थानों पर प्राइमरी स्कूल चल रहे हैं। इसके चलते इन इंटर कालेजों और प्राइमरी स्कूलों में पढ़ने वाले सैकड़ों छात्र-छात्राओं की जान को खतरा बना हुआ है। इसी तरह अल्मोड़ा के जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) एवं लोकसूचना अधिकारी ने सूचना भेजी है कि उनके जिले में 38 राजकीय हाईस्कूल एवं राजकीय इंटर कालेज जीर्ण क्षीण भवनों में चल रहे हैं। इसके अलावा देहरादून, चमोली, रुद्रप्रयाग और टिहरी गढ़वाल में भी जर्जर भवनों में विद्यालय संचालित होने की सूचना मिली है। हालांकि शिक्षा विभाग के अधिकारियों का दावा है कि जर्जर भवनों में चल रहे स्कूलों को सुरक्षित भवनों में संचालित किए जाने के संबंध में संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए जा चुके हैं।
जनपद स्कूलों की संख्या
0 नैनीताल 45
0 अल्मोड़ा 39
0 देहरादून 22
0 चमोली 08
0 रुद्रप्रयाग 06
0 टिहरी गढ़वाल 03
0 चंपावत 02
