आयुर्वेद-यूनानी के तत्कालीन निदेशक सहित अन्य को नोटिस

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने आयुर्वेद एवं यूनानी विभाग में दवाई व चिकित्सा यंत्रों की खरीद में हेराफेरी के मामले में तत्कालीन निदेशक सहित अन्य को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। हरिद्वार निवासी डा. रमाकांत शर्मा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आयुर्वेद एवं यूनानी विभाग की तत्कालीन निदेशक डा. पूजा भारद्वाज, ऋषिकुल आयुर्वेदिक कालेज के प्रधानाचार्य डा. प्रदीप भारद्वाज, डा. पीडी शर्मा व डीएन शर्मा के विरुद्ध याचिका दायर कर वित्तीय अनियमितता का आरोप लगाते हुए वैधानिक कार्यवाही करने की प्रार्थना की गई थी। याचिका में कहा है कि तत्कालीन निदेशक डा. पूजा भारद्वाज ने आयुर्वेद एवं यूनानी विभाग में दवाईयों व चिकित्सा यंत्रों की खरीद में भारी वित्तीय अनियमितताएं की है।
याचिकाकर्ता अजयवीर पुंडीर ने कोर्ट में तर्क दिया कि इस मामले में पूर्व में राज्य सरकार ने विजिलेंस जांच की संस्तुति की है। 7 जून 2008 में राज्य सरकार की ओर से गठित विजिलेंस सेक्टर ने प्राथमिक जांच भी की, लेकिन आज तक कोई कार्यवाई नहीं हुई। याचिका में यह भी कहा कि तत्कालीन निदेशक पूजा भारद्वाज ने अपने पति प्रदीप भारद्वाज को नियम विरुद्ध सर्विस बुक में हेराफेरी कर ऋषिकुल आयुर्वेदिक कालेज का प्रधानाचार्य भी नियुक्त कर दिया। जबकि प्रदीप भारद्वाज से वरिष्ठ प्रोफेसर विभाग में तैनात हैं। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने तत्कालीन निदेशक डा. पूजा भारद्वाज, ऋषिकुल आयुर्वेदिक कालेज के प्रधानाचार्य डा. प्रदीप भारद्वाज, डा. पीडी शर्मा व डीएन शर्मा को नोटिस जारी कर 2 सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए।

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