डेढ़ हजार का छिन गया रोजगार

मनाली। एक तरफ बैंक का कर्ज और दूसरी ओर रोजी-रोटी की चिंता। कुछ इस तरह की ही चिंता में हैं मनाली के टैक्सी आपरेटर, स्नो स्कूटर तथा एटीवी संचालक। टैक्सी यूनियन मनाली के मुताबिक चार साल पुराने वाहनों पर प्रतिबंध लगने से करीब डेढ़ हजार से अधिक वाहनों चालकों पर असर पड़ा है। वाहन चालकों का कहना है कि उन्हें वाहन का कर्ज चुकाने के लिए कम से कम 6 साल लगते हैं लेकिन चार साल पुराने वाहनों पर रोहतांग जाने पर प्रतिबंध लगने से वह कर्ज कैसे चुका पाएंगे। प्रशासन के प्रतिबंध से प्रभावित हुए इन हजारों लोगों का कहना है कि सरकार को उनकी समस्या के समाधान को गंभीरता दिखानी होगी।
जानकारी के अनुसार प्रशासन के इस प्रतिबंध से करीब 35 करोड़ के वाहन तथा 20 करोड़ के एटीवी और स्नो स्कूटरों की रफ्तार थम गई है। इन सभी प्रभावित परिवारों की नजरें अब सिर्फ उच्च न्यायालय पर टिकी हैं। अगर इन परिवारों को यहां भी राहत नहीं मिलती है, तो इनका जीना मुश्किल हो सकता है।
टैक्सी यूनियन के अलावा पिछले एक दशक से उझी घाटी के 9 गांव के सैकड़ों परिवार मात्र रोहतांग पर आश्रित होकर रह गए हैं। अधिकतर घरों के चूल्हे रोहतांग की कमाई पर ही चलते हैं। जमीनें कम होने के चलते लोगों ने बागवानी और खेती से दूरी बना ली है। ऐसे में उनका जीवन यापन सिर्फ रोहतांग पर निर्भर है। उझी घाटी निवासी रोशन का कहना है कि लोगों ने कर्ज लेकर विदेशों से स्नो स्कूटर और एटीवी खरीदे हैं, ऐसे में दर्रे जाने प्रतिबंध लगने से रोजी-रोटी पर बन आई है। बहरहाल, वाहन चालकों और स्नो स्कूटरों सहित एटीवी संचालकों की दिक्कतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। टैक्सी यूनियन के महासचिव मक्कर ध्वज शर्मा ने बताया कि रोहतांग के लिए चार साल पुराने वाहन न जाने की शर्त से टैक्सी यूनियन मनाली के दो हजार वाहनों में से करीब डेढ़ हजार रोहतांग नहीं जा पाएंगे। इससे आपरेटरों को भारी नुकसान होगा।

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