
कुल्लू। जिले के युवा अब माटी का मोल पहचानने लगे हैं। वे जान चुके हैं कि माटी अगर पसीने से सनी हो तो फिर सोना उगलने में देर नहीं लगाती। शायद ही कारण रहा हो कि युवा अब कृषि को बतौर रोजगार अपना रहे हैं। कृषि विभाग के मुताबिक पढ़ने लिखने के बाद युवा सरकारी नौकरियों के पीछे भागने के बजाए कृषि और बागवानी को रोजगार का जरिया बना रहे हैं। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक जिले में 50,823 युवा कृषि से जुड़े हैं। आत्मनिर्भरता के इस सफर में कृषि विभाग के माध्यम से आरंभ कल्याणकारी योजनाएं भी युवाओं के लिए लाभदायक साबित हो रही हैं।
जिला के 5503 वर्ग किमी क्षेत्र में से करीब 36224 हेक्टेयर क्षेत्र में कृषि होती है। इसमें मुख्य रूप से गेहूं, मक्का, सब्जियां और दालों की फसलें उगाई जाती हैं। बेमौसमी सब्जियां मटर, बंदगोभी, फूलगोभी, टमाटर और विदेशी सब्जियां जैसे ब्रॉकली, लाल बंदगोभी, एसपैरागस, पार्सले तथा लीक आदि नगदी फसलें भी यहां उगाई जा रही हैं। यही नहीं इन नकदी फसलों की सप्लाई दिल्ली जैसे महानगरों तक होती है। युवाओं के साथ महिलाएं भी कृषि क्षेत्र से जुड़कर आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हैं।
कृषि विभाग के उपनिदेशक बीएल शर्मा ने बताया कि अजा और पिछड़ा वर्ग के लोगों के लिए विशेष सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं। कृषकों की समस्याओं के समाधान के लिए 27 केंद्र स्थापित किए हैं। विभाग ने 43 तकनीकी फील्ड स्टाफ रखा है। इसके तहत सुधरे बीज, पौध संरक्षण दवाइयां और उन्नत कृषि औजार आदि पर अनुदान दिया जा रहा है। किसान बागवान समृद्धि योजना एक के तहत पॉलीहाउसों के निर्माण पर 85, स्प्रिंकलर सिंचाई योजना पर 80, सिंचाई के टैंक, कुओं और पंपिंग मशीनरी पर 50 फीसदी तक सब्सिडी दी जा रही है।
