फसल को वाजिफ दाम में बेचना आसान

रुद्रपुर। किसानों को अब बिचौलियों का शिकार और सस्ते में फसल बेचने की मजबूरी नहीं रहेगी। किसान कोल्ड स्टोरेज (वेयरहाउस/गोदाम) में फसल को संरक्षित (भंडारित) कर उसे बाद में आसानी से वाजिफ दाम में बेच सकेंगे। फसल को संरक्षित रखने के लिए किसान बैंक से अल्पकालिक फसली लोन योजना में तीन लाख तक का लोन तो ले ही सकेंगे। बाकायदा कर्ज समय पर चुकाने पर सात के बजाए चार फीसदी की दर से ब्याज वसूला जाएगा। दूसरा लोन चुकाने की समय सीमा एक साल से बढ़ाकर डेढ़ साल कर दी गई हैं। दरअसल फसल तैयार होने के बाद बाजार में अधिक मात्रा में आवक आने से उसके दाम घट जाते हैं और बिचौलिए अलग से किसानों को बरगलाने से बाज नहीं आते हैं। ऐसे में किसानों को फसल पकने के बाद उसी दौरान सस्ते में बेचने की मजबूरी रहती है, लेकिन अब रिजर्व बैंक ने किसानों को फसल का अधिक दाम, बिचौलियों से छुटकारा दिलाने व व्यथित बिक्री पर रोक लगाने के लिए अल्पकालीन फसली कर्ज योजना में परिवर्तन कर दिया है। किसान गेहूं, चावल, आलू, मटर ,धान, बाजरा, सरसों, सोयाबीन, नारियल सहित चालीस तरह की फसलों को भंडारगृहों में संरक्षित कर बाद में बिक्री को बैंक से तीन लाख तक का लोन ले सकेंगे। दूसरा कर्ज चुकाने की सीमा भी डेढ़ साल कर दी गई है। भांडारण विनियामक प्राधिकारण (डब्लयूडीआरए) सीएमडी (अध्यक्ष) दिनेश राय ने इस संबंध में बैंकों को दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं। इधर लीड बैंक अधिकारी विशंभर दयाल ने बताया कि केंद्र सरकार फसल को भंडारित कर बाद में किसानों को उचित मूल्य दिलाने का प्रयास कर रही है। अल्प कालीन फसली ऋण का संचालन भी इसी उद्देश्य से किया जा रहा है। बताया कि संरक्षित फसल को आराम से बेचने के लिए कर्ज चुकाने की समय सीमा छह माह के लिए और बढ़ा दी है। पहले यह एक अवधि एक साल के लिए ही थी। बताया कि इस योजना की नोडल एजेंसी आरबीआई और नाबार्ड हैं। आरबीआई के निर्देश के क्रम में सभी बैंकों को योजना में परिवर्तन संबंधी दिशा निर्देश जारी किए जा रहे हैं।

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