तो नौकरी से वंचित हो जाएंगे सैकड़ों

भुंतर (कुल्लू)। हिंदी भाषी राज्य होने के बावजूद प्रदेश के स्कूलों में भाषा अध्यापकों के हजारों पद रिक्त पड़े हैं। वर्ष 2011 में करीब तीन हजार बेरोजगार युवक-युवतियों ने टैट की परीक्षा पास की थी। आयु सीमा की बंदिश के चलते इनमें कई टैट पास युवा सरकारी नौकरी की पात्रता से बाहर होने वाले हैं।
राज्य में विभिन्न कैटेगरियों की भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद हिंदी भाषा अध्यापकों की भर्ती का मामला दो सालों से लटका पड़ा है। परिणामस्वरूप हजारों भाषा अध्यापकों में सरकार के प्रति रोष है। पूर्व सरकार ने चुनाव से ठीक एक साल पहले भाषा अध्यापक, शास्त्री, टीजीटी आर्ट, मेडिकल और नॉनमेडिकल का टीचर एलिजिबिल्टी टेस्ट परीक्षा आयोजित करवाई थी। अन्य श्रेणियों की बैच वाईज भर्ती हुई लेकिन भाषा अध्यापक का मामला अभी तक फाइलों में बंद पड़ा है। बाद में विधानसभा चुनाव के चलते सीधी भर्ती पर रोक लगा दी गई। अब प्रदेश में कांग्रेस सरकार को सत्तासीन हुए करीब छह माह हो चुके हैं।
सरकार ने टीजीटी आर्ट, मेडिकल और नॉनमेडिकल सहित विभिन्न श्रेणियों के करीब साढे़ पांच सौ पद भरने के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। दूसरी ओर शिक्षा विभाग ने बैकलॉग की भर्ती भी शुरू कर दी है। दुर्भाग्यवश भाषा अध्यापकों के साथ सौतेला व्यवहार जारी है। दो वर्ष बीत जाने के बाद भी टैट पास भाषा अध्यापक नौकरी के लिए ठोकरें खाने को मजबूर हैं। टैट पास भाषा अध्यापक सुनीता, मनोज, राजकुमार और रमेश कुमार ने कहा कि सरकार का हिंदी के साथ ऐसा व्यवहार भविष्य के लिए ठीक नहीं है। उन्होंने मांग की है कि जल्द ही भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाए।

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