
पीपलकोटी (चमोली)। गर्मियों की दस्तक देते ही उम्मीद जगी थी कि बर्फ पिघलने पर नदियों में जल प्रवाह बढे़गा और जल विद्युत परियोजनाएं पूरी क्षमता से चलने लगेंगी। लेकिन अलकनंदा, नंदाकिनी में ऐसा जल प्रलय आया कि विद्युत परियोजनाएं आज दम तोड़ती नजर आ रही हैं।
शीतकाल में इन जल विद्युत परियोजनाओं से 80 फीसदी से ज्यादा उत्पादन प्रभावित हुआ था। विगत मई माह में परियोजनाओं से 1.79 मिलियन यूनिट बिजली पैदा होने लगी थी, लेकिन जल प्रलय के बाद विष्णुप्रयाग, हिम ऊर्जा, चमोली हाइड्रो और तेफना जल विद्युत परियोजना का चेनल गेट ही नहीं, बल्कि पावर हाउस भी पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त हो गया है। विष्णुप्रयाग जल विद्युत परियोजना अलकनंदा नदी की भेंट चढ़ गई है। अब इस परियोजना के पुन: शुरू होने में कई साल लगेंगे। नंदाकिनी नदी के प्रवाह से हिम ऊर्जा कंपनी की 18 मेगावाट की बनाला, तेफना जल विद्युत परियोजनाएं भी पूरी तरह से नष्ट हो गई हैं। बनाला जल विद्युत परियोजना रन ऑफ द रीवर परियोजना है, लेकिन परियोजना के डैम साइड नहर को नदी बहा ले गई है, इससे बिजली उत्पादन पूरी तरह से ठप हो गया है।
चमोली के ठप पड़े पावर हाउस
विष्णुप्रयाग जल विद्युत परियोजना- 400 मेगावाट
चमोली हाइड्रो- 5 मेगावाट
हिम ऊर्जा बनाला, तेफना- 18 मेगावाट
ऋषि गंगा- 13.2 मेगावाट
अलकनंदा और सहायक नदियों में बाढ़ आने से विद्युत उत्पादन ठप पड़ा है। दो परियोजनाओं से ही करीब आठ मिलीयन यूनिट बिजली मिल रही है। जबकि इन दिनों परियोजनाओं से प्रतिमाह करीब 32 मेगावाट तक बिजली मिल जाती थी। विष्णुप्रयाग पावर प्रोजेक्ट से यूपी को बिजली जाती थी, जो वर्तमान में बंद पड़ा हुआ है।
-वीरेंद्र पंवार, ईई, ऊर्जा निगम, चमोली।
