
मंडी। ब्यास नदी और सुकेती खड्ड के संगम पर बसे मंडी शहर के तटवर्ती क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति में खतरा बना रहता है। भारी बारिश होने पर ब्यास नदी और सुकेती खड्ड तट पर बसे लोगों पर कहर बरपा सकती है। करीब 17 साल पहले भयंकर बारिश से ब्यास नदी ने रौद्र रूप धारण कर लिया था। जिससे ब्यास और सुकेती के संगम पर स्थापित ऐतिहासिक पंचवक्त्र मंदिर तक पानी का जलस्तर पहुंच गया था। हालांकि उस वक्त कोई बड़ा जानमाल का नुकसान नहीं हुआ था। लेकिन, लोगों में अफरा-तफरी मच गई थी। वहीं बल्ह घाटी से नेरचौक क्षेत्र में बहने वाली सुकेती खड्ड वर्ष 1960 में भयंकर बाढ़ से अपना कहर ढहा चुकी है।
बरसात के मौसम में ब्यास नदी का जलस्तर उफान पर होता है। जिससे ब्यास नदी के तटीय इलाकों में जानमाल की सुरक्षा के लिए अलर्ट किया जाता है। ब्यास व सुकेती खड्ड के संगम पर बसे मंडी शहर के भ्यूली, पुरानी मंडी, पंचवक्त्र मंदिर, हनुमान घाट, खलियार क्षेत्र के नदी से सटे क्षेत्रों में खतरा बना रहता है। हनोगी मंदिर के पास ब्यास का जलस्तर नेशनल हाईवे तक पहुंच जाता है। जिससे एनएच पर यातायात बंद हो जाता है। ब्यास नदी में बाढ़ की स्थिति में मंडी शहर, लडभड़ोल क्षेत्र के कोठी गांव, धर्मपुर क्षेत्र के कांढापतन, वन, स्योह, संधोल सहित कांगड़ा जिला जयसिंहपुर, सुजानपुर के तटीय इलाकों में कहर ढह सकता है। इस बरसात में अभी तक जंजैहली घाटी में बादल फटने से जबाल खड्ड में आई बाढ़ से भारी तबाही हुई है। जिससे करीब दो करोड़ का नुकसान हुआ है।
मिनी पंजाब के नाम से प्रसिद्ध बल्ह घाटी से बहने वाली सुकेती खड्ड में 1960 में आई बाढ़ से भारी तबाही हुई थी। जिसके बाद खड्ड के तटीय क्षेत्रों को फ्लड जोन घोषित किया। इसके बावजूद फ्लड जोन में कई रिहायशी मकान बन गए हैं। ढालू खड्ड में मक डंपिंग से गत दिनों भारी बारिश से जुगाहण, छात्र व साई पंचायत के किसानों की फसलें बर्बाद हो गई। बरोट क्षेत्र में ऊहल नदी के मुहाने पर भी कई घर बने हैं। पिछले साल भी ऊहल नदी में बाढ़ से भारी नुकसान हुआ था।
उपायुक्त देवेश कुमार का कहना है कि बरसात के मौसम में आपदा से निपटने के लिए प्रशासन सतर्क है। नदी और खड्डों के तट पर रहने वाले लोगों को अलर्ट किया गया है। साथ ही लोगों को नदी व खड्डों की तरफ न जाने के लिए आगाह किया गया है।
प्राकृतिक स्रोत के बहाव में बाधा उत्पन्न न करें
छठी गृह रक्षा वाहिनी मंडी के कमांडेंट सेवानिवृत्त मेजर खेम सिंह ठाकुर का कहना है कि प्राकृतिक स्रोत नदी, नाले और खड्डों के बहाव में अवरोधक नहीं बनना चाहिए। प्राकृतिक स्रोतों के बहाव में बाधा उत्पन्न की जाए तो इसके नुकसान का खतरा रहता है। जहां पर खतरा है वहां पर रिटेनिंग वाल और चेक डैम बनाए जाने चाहिए।
