
श्रीनगर। आपदा राहत कार्यों में जिला प्रशासन की कार्यशैली से नाराज आपदा प्रभावितों ने शुक्रवार को शक्ति विहार में राष्ट्रीय राजमार्ग पर सांकेतिक जाम लगा दिया। उन्होंने न तो सहायता राशि के चेक लिए और न मलबा हटाने का काम होने दिया। प्रभावितों ने आरोप लगाया कि प्रशासन राहत कार्यों से हाथ खींचकर अपने वायदे से मुकर रहा है। उन्होंने प्रदर्शन करते हुए सभी घरों से मलबा हटाने, आपदा में हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति करने, अनुभवी इंजीनियरों की टीम से मौका मुआयना करवाकर मलबा हटाने और आगे की रणनीति तैयार करने की मांग उठाई।
एसडीएम रजा अब्बास, जिला विकास अधिकारी बीसी भट्ट शुक्रवार को सहायता राशि के चेक लेकर शक्ति विहार पहुंचे तो बाढ़ प्रभावितों ने इन्हें लेने से इनकार कर दिया। कमलेश नैथानी, नरेंद्र पुंडीर, मानव बिष्ट, विजयलक्ष्मी रतूड़ी आदि ने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन चेक देकर अपना पल्ला छुड़ाना चाहता है। उन्होंने बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर सांकेतिक जाम भी लगाया। प्रभावितों ने कहा कि प्रशासन ने मजदूरों को हटा लिया है और पचास हजार के चेक देकर प्रभावितों को अपने स्तर पर मलबा हटाने को कहा जा रहा है। जबकि डीएम ने वादा किया था कि मलबा हटाने में जो भी मजदूर लगाए जाएंगे उनका भुगतान प्रशासन करेगा। मगर अब प्रभावितों को पुराने भुगतान भी खुद ही करने को कहा गया है। यही नहीं पूर्व में फौरी तौर पर जारी की गई सहायता राशि भी इसी में समायोजित करने की बात हो रही है।
कोट
प्रभावितों का जो भी भुगतान है वह किया जा रहा है। फिलहाल इस मामले में कोई सहमति नहीं बन पाई है। शनिवार को फिर से बातचीत की जाएगी। मलबे को हटाने के लिए प्रभावितों और इंजीनियरों के साथ बैठकर योजना तैयार की जाएगी। – रजा अब्बास, एसडीएम श्रीनगर।
आईटीआई कर्मचारियों की नहीं ली सुध
श्रीनगर। अलकनंदा की बाढ़ के 13 दिन बाद भी आईटीआई परिसर में रहने वाले पांच कर्मचारियों के परिवारों की कोई सुध नहीं ली गई है। शुक्रवार को सभी लोग अधिकारियों के सामने अपना दुखड़ा लेकर पहुंचे। आईटीआई कर्मचारी बबलेश गैरोला ने बताया कि पांच परिवारों का सामान अब भी मलबे में दबा हुआ है। मगर सरकारी भवन होने के कारण किसी का भी ध्यान इस ओर नहीं गया है। उन्होंने अपील की है कि कम से कम उनका कीमती सामान निकालने की व्यवस्था की जाए।
नहीं देना होगा किराया
श्रीनगर। मलबे में दबे सरकारी आवासों के निवासियों को फिलहाल कोई भी किराया नहीं देना होगा। आईटीआई प्रभावितों की शिकायत पर जिला विकास अधिकारी बीसी भट्ट ने इसकी घोषणा की। 16 जून की बाढ़ में कई सरकारी आवासीय भवन मलबे में दब गए हैं। इस कारण यहां के परिवार राहत शिविरों में रह रहे हैं। मौजूदा हालातों में इन आवासीय भवनों से अगले कुछ महीनों तक मलबा हटाना संभव नहीं है। ऐसे में कर्मचारियों के वेतन से फिलहाल हाउस रेंट न काटने के निर्देश दिए हैं।
