
कोटद्वार। आखिर वन विभाग को नदियों में मछलियों के शिकारियों पर लगाम कसने की सुध आ ही गई। विभाग ने नगर और खोह नदी के ग्रामीण क्षेत्रों के किनारे बसी बस्तियों में एनाउंसमेंट कर लोगों को मछलियां न मारने की अपील की गई। इसके साथ ही लोगों से बरसात के चलते नदियों में न जाने को भी कहा गया।
अमर उजाला ने 23 जून के अंक में ‘नदियां चढ़ते ही आई शिकारियों की बाढ़’ शीर्षक से प्रकाशित खबर में खुलासा किया था कि किस तरह दुगड्डा से लेकर कोटद्वार तक नदियों में मछलियों का शिकार किया जा रहा है। दुर्गम वन क्षेत्रों में हर रोज सैकड़ों किलोे मछलियों का शिकार नदियों में जाल लगाने के साथ ही विस्फोटकों की मदद से करने की बात सामने आई थी। यही नहीं, कई जगह नदी में करंट छोड़ने की बात भी सामने आ रही है। खबर का संज्ञान लेते हुए डीएफओ नेहा वर्मा ने मामले में कार्रवाई की बात कही थी। शुक्रवार को नगर और ग्रामीण क्षेत्रों में विभाग की ओर से भेजे गए वाहन में कर्मचारियों ने एनाउंसमेंट कर शिकार न करने की अपील लोगों से की। इस दौरान ग्रामीणों से बांस की नई कोंपलें न काटने की भी अपील की गई।
यहां शिकार के मामले
खोह नदी पर चूना धारा, लालपुल, पांचवें मील से आगे झील, सिद्धबली मंदिर के पिछले हिस्से में, प्लेन नदी पर ढौंटियाल, सिलगाड़ में फतेहपुर, लंगूर गाड़ में हनुमंती, मटियाली, कोल्हू नदी पर कोटड़ी, सनेह क्षेत्रों में इन दिनों जमकर मछलियों का शिकार किया जा रहा है।
