
गोपेश्वर। पहाडों पर प्रलय के बाद राहत की आस लगाये ग्रामीणों तक 13 दिनों बाद भी राहत नहीं पहुंच पाई है। गांवों को जोड़ने वाली जनपद की 45 सड़कें बंद पड़ी हैं। जिससे ग्रामीण अब भुखमरी की कगार पर खड़े हो गये हैं। राहत के नाम जिला मुख्यालय और तहसील मुख्यालयों में राहत सामग्री गोदामों में पर्याप्त मात्रा में है, लेकिन, ये सामग्री गांवों तक कैसे पहुंचेगी इसका कोई सुधलेवा नहीं है।
नगर मुख्यालय के स्पोर्टस स्टेडियम में राहत सामग्री के लिये बनाए गये गोदाम में खाद्यान्न भरा है। यह खाद्यान्न जरूरतमंदों तक कब पहुंचेगा इसका कोई इंतजाम नहीं दिख रहा है। गोदामों में भरी राहत सामग्री में खराब होने वाला सामान भी बोरों में बंद पड़ा है। आपदा के चलते जोशीमठ, दशोली, घाट, पोखरी, नारायणबगड़ सहित अन्य सभी प्रखंडों में मोटर और संपर्क मार्ग क्षतिग्रस्त हैं। इन क्षेत्रों में निवास करने वाले हजारों ग्रामीणों के सम्मुख खाद्यान्न और स्वास्थ्य की समस्या खड़ी हो गई है। माणा गांव की प्रधान गायत्री मोल्फा कहती हैं कि तीर्थयात्रियों की आवाभगत करने के लिए घरों से राशन एकत्र किया गया था, लेकिन अब सभी घरों में खत्म हो चुका है। जिससे भुखमरी की स्थिति पैदा हो गई है। उर्गम गांव के लक्ष्मण सिंह का कहना है कि सरकार और प्रशासन को तीर्थयात्रियों के साथ स्थानीय ग्रामीणों की भी सुध लेनी चाहिए। कनोल गांव निवासी गौर सिंह नेगी का कहना है कि घाट क्षेत्र में भी आपदा के चलते भारी तबाही हुई है, लेकिन 13 दिन गुजर जाने के बाद भी ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासन के अधिकारी व कर्मचारियों के न पहुंचने से ग्रामीणों में आक्रोश व्यापत है। अपर जिलाधिकारी, संजय खेतवाल का कहना है कि लोनिवि को सड़क व संपर्क मार्गों को शीघ्र दुरुस्त करने के लिये निर्देश दे दिये गये हैं। किसी क्षेत्र में परेशानी है तोे हेलीकाप्टरों के माध्यम से खाद्यान्न पहुंचाया जायेगा।
