
चंबा। रावी नदी के किनारे स्थित मंजरी गार्डन को पर्यटन के लिए विकसित करने की कवायद शुरू हो गई है। पर्यटकों की नजरों से दूर इस पर्यटन स्थल में जल्द पर्यटकों की चहल-पहल बढ़ने वाली है। इसके लिए वन विभाग की ओर से आचार संहिता के बाद गार्डन की मरम्मत व इसके रखरखाव के लिए टेंडर आमंत्रित किए जाएंगे। टेंडर के बाद इस गार्डन का निजीकरण कर दिया जाएगा। इसके बाद वन विभाग की ओर से ठेकेदार से हर माह लगभग 30 हजार की राशि किराए के रूप में वसूल की जाएगी। विभाग की आमदन भी होगी। वन विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक मंजरी गार्डन को पर्यटन के लिए विकसित होगा। मंजरी गार्डन स्थित स्वीमिंग पूल को चालू किया जाएगा। नगर परिषद की ओर से करोड़ों की राशि खर्च कर तैयार किए गए कैफे को भी शुरू किया जाएगा।
लंबे समय से मंजरी गार्डन में स्वीमिंग पूल और कैफे का निर्माण हो चुका है, लेकिन आज तक न तो स्वीमिंग पूल में पानी आया और न ही कैफे को चालू किया गया। इस कारण प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण यह पर्यटन स्थल बहारी पर्यटकों की नजरों से दूर है। वन विभाग के डीएफओ किरपा शंकर एम ने बताया कि मंजरी गार्डन को पर्यटन के लिए विकसित किया जाएगा। इसके लिए आचार संहिता खत्म होते ही टेंडर करवाए जाएंगे और इसके रखरखाव का जिम्मा निजी हाथों में दे दिया जाएगा। विभाग की ओर से किराए के रूप में हर माह लगभग 30 हजार की राशि वसूल की जाएगी।
मंजरी गार्डन में प्रवेश के लिए किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं वसूला जाएगा। इससे स्थानीय पर्यटकों को काफी सहूलियत मिलेगी। पहले वन विभाग की ओर से गार्डन में घूमने के लिए शुल्क लेने का निर्णय लिया था, लेकिन लोकल पर्यटकों की ज्यादा संख्या को देखते हुए यहां पर प्रवेश निशुल्क होगा।
मिंजर मेले के दौरान मिंजर का विसर्जन भी मंजरी गार्डन से किया जाता है। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। इसके चलते मिंजर विसर्जन स्थल को भी जिला प्रशासन की ओर से मार्डन रूप दिया जाएगा।
