
नई दिल्ली। अदालत ने दुष्कर्म व गंभीर किस्म के अपराध में लिप्त लोगों को मताधिकार से वंचित करने के संबंध में दायर याचिका के मामले जवाब दाखिल न करने पर पुलिस के प्रति नाराजगी जताई है। अदालत ने पुलिस के उस तर्क को खारिज कर दिया कि उसे याचिकाकर्ता की शिकायत ही नहीं मिली। अदालत ने जांच अधिकारी को 25 जुलाई तक कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
पटियाला हाउस स्थित मैट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट आकाश जैन की अदालत में पेश जांच अधिकारी घनश्याम ने बताया कि उन्हें अभी तक पार्लियामेंट थाने में शिकायत नहीं मिली। ऐसे में वे कोई भी कार्रवाई करने में असमर्थ हैं। अदालत ने उनके तर्क को खारिज करते हुए कहा कि पेश साक्ष्यों से स्पष्ट है कि याची सत्यवीर सिंह ने पुलिस मुख्यालय व क्षेत्रीय डीसीपी कार्यालय में शिकायत दी थी। इस तथ्य से जांच अधिकारी अवगत है। अदालत ने कहा यदि जांच अधिकारी सही ढंग से अपनी ड्यूटी निभाता तो वहां से शिकायत लेकर कार्रवाई रिपोर्ट दायर कर सकता था।
नजफगढ़ क्षेत्र निवासी सत्यवीर सिंह ने हाल ही में चुनाव आयोग कार्यालय व तीनों चुनाव आयुक्त को पक्ष बनाते हुए याचिका दायर की थी। उन्होंने तर्क रखा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद-326 के तहत विकृत मानसिकता, आपराधिक मामलों के आरोपी, बुरे चरित्र वाले और दुष्कर्म व गंभीर अपराध के मामलों में लिप्त रहे लोगों को वोट का अधिकार नहीं दिया जा सकता।
