
गौचर से। अष्टम वाहिनी विजयते। यही लिखा है आईटीबीपी (भारतीय तिब्बत सीमा पुलिस) के गेट के किनारे लगे साइन बोर्ड पर । केदारनाथ में आयी आपदा के दौरान आईटीबीपी की आठवीं वाहिनी के अफसरों और जवानों ने अपनी जांबाजी से इस बोर्ड पर लिखे एक-एक शब्द को सार्थक किया है। अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए आईटीबीपी के छह जवान केदारनाथ-गौरीकुंड के बीच जंगलचट्टी में हुई चॉपर दुर्घटना में शहीद हो गए लेकिन यह दुर्घटना भी जवानों के हौसलों को नहीं डिगा पाई।
बृहस्पतिवार को आईटीबीपी केे डीआईजी अमित प्रसाद और कमांडेंट जीएस चौहान ने जवानों को गले लगाकर उनके काम को सराहा। उन्होंने केदारनाथ आपरेशन का पूरा श्रेय अधिकारियों और जवानों को दिया।
कमांडेंट चौहान बताते हैं कि जवानों ने सोनप्रयाग से लेकर केदारनाथ तक रेस्क्यू आपरेशन बेहतर तरीके से किया। दु:ख सिर्फ इस बात का है कि काम खत्म होने के बाद हमारे छह जवान शहीद हो गए। लेकिन इस बात का गर्व है कि हम लोगों की आशा पर खरे उतरे।
रेस्क्यू ऑपरेशन की कमान संभालने वाले डिप्टी कमांडेट रणवीर नेगी ने बताया कि 60 जवान और आठ अफसरों ने सोनप्रयाग और गौरीकुंड से आपरेशन चलाया। जंगलचट्टी और गौरीकुंड में सबसे बड़ी चुनौती जनता को नियंत्रित करना और उनको हेली तथा पैदल मार्ग से बाहर निकलना था। स्थानीय लोगों की मदद से रास्ता बनाकर लोगों को बचाया गया। सभी अधिकारी और जवान अपने काम का क्रेडिट एक दूसरे को दे रहे थे। जो आईटीबीपी की टीम स्प्रिट को जाहिर करता था।
