
किवदंतियां है कि पोते के कांधे पर दादा की अर्थी जाए तो उस पर मातम नहीं होता। लेकिन ब्लाक के सारकोट पर प्रकृति ने ऐसा कहर बरपाया कि यहां दादा को पोते का क्रियाकर्म करना पड़ रहा है।
नौकरी के लिए केदारनाथ गए सारकोट गांव के सात युवक आपदा में जान गंवा बैठे। इससे गांव में मातम का माहौल है।
विनाशकारी बाढ़ ने चपेट में ले लिया
केदारनाथ गया सारकोट गांव का ही देवेंद्र (21) पुत्र राजे सिंह 24 को सकुशल घर लौट आया है। 16-17 जुलाई की विनाशलीला बयां करते हुए उसने बताया कि गांव के सात युवकों के साथ वह भी केदारनाथ स्थित केदार मिष्ठान भंडार और भोजनालय में काम कर रहा था। उसके साथी गांव के सात युवकों को विनाशकारी बाढ़ ने चपेट में ले लिया।
वह होटल मालिक के पुत्र के साथ बड़ी मुश्किल से छत पर चढ़ गया। और फिर दूसरे भवनों में कूदकर उसने जान बचाई। केदारनाथ के केदार मिष्ठान भंडार एवं भोजनालय में काम करने वाले 20 व्यक्तियों के सोबन (37) पुत्र सुनार सिंह के दो बच्चों में सबसे छोटा तीन माह का है।
उसे पता नहीं कि पिता की छांव क्या होती है। प्रेम सिंह (30) मकर सिंह की 4 पुत्रियां हैं। इनमें सबसे छोटी सात माह की है। भीम सिंह (28) के तीन बच्चों में सबसे छोटा छह माह का है।
पुत्री और पत्नी को छोड़ गया
कल्याण सिंह (34) पुत्र राम सिंह के दो बच्चे हैं राम सिंह का ही दूसरा लड़का हयात सिंह (25) दो पुत्रियों को छोड़ प्रलय की भेंट चढ़ गया है। राजे सिंह (30) स्व. कमाल सिंह असहाय पुत्री और पत्नी को छोड़ गया है। तो दसवीं की परीक्षा देकर पिता विहीन धर्म सिंह पढ़ाई का खर्च निकालने केदारानाथ धाम गया था।
