सरकार : तो ऐसे कैसे होगा बेहतर उपचार

कुल्लू। विशेषज्ञ चिकित्सकों को सरकारी अस्पतालों की नौकरी रास नहीं आ रही। सरकारी अस्पतालों में कुछ समय सेवाएं देने के बाद डाक्टर निजी संस्थानों की ओर रुख करने लगे हैं। क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में तैनात दो स्त्री रोग विशेषज्ञ चिकित्सकों ने भी सरकारी से त्यागपत्र दे दिया है। अब कुल्लू समेत जनजातीय क्षेत्र लाहौल-स्पीति और पांगी किलाड़ तथा मंडी की हजारोें महिला मरीजों की जिम्मेदारी महज एक चिकित्सक के कंधे पर है। वहीं ईएनटी स्पेशलिस्ट ने सेवानिवृत्ति ले ली है। पहले ही डाक्टरों की कमी की मार झेल रहे कुल्लू अस्पताल का इस कारण व्यवस्थागत ढांचा चरमरा गया है। इसकी पुष्टि एसएमओ डा. कमल कपूर ने की है।
विभागीय जानकारी के अनुसार क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में दो गायनी विशेषज्ञों ने सरकारी जॉब छोड़ी दी। इसके अलावा गले, नाक, कान के विशेषज्ञ डा. महेश कपूर सेवानिवृत्त हो गए हैं। डाक्टरों की कमी का खामियाजा मरीजों को झेलना पड़ रहा है। गायनी विशेषज्ञ डा. अनु, सर्जन डा. प्रेम लाल ठाकुर और डा. आशीष केलांग में चल रहे कैंप में गए हैं। इसके चलते कुल्लू अस्पताल में इलाज को आ रहे मरीजों के आपरेशन तक नहीं हो रहे। ओपीडी में भी मरीजों को घंटों तक लाइन में लगना पड़ रहा है। बुधवार को अस्पताल में इलाज करवाने आए मणिकर्ण के तुले राम और दिनेश ने कहा कि उन्हें दिनभर ओपीडी के बाहर खड़ा रहने पड़ा लेकिन डाक्टर न होने से उन्हें निजी अस्पताल में जाकर उपचार करवाना पड़ा।
एसएमओ डा. कमल कपूर ने बताया कि तीन जिलों को स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने वाले अस्पताल का जिम्मा मात्र 19 डाक्टरों के सहारे है। अस्पताल में चल रही डाक्टरों की कमी बारे विभाग के आला अधिकारियों से पत्राचार किया है।

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