गुरु के बिना कैसे मिलेगा किताबी ज्ञान

कुल्लू। घर के पास बेहतर शिक्षा मुहैया करवाने के दावे सियासी मंचों तक ही सीमित हैं। जमीनी तस्वीर हैरत भरी है। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल बरशैणी में शिक्षकों की कमी जानकर इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। स्कूल में 450 बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं लेकिन शिक्षकों की कमी के चलते बच्चों की पढ़ाई चौपट होकर रह
गई है।
मार्च में यहां से प्रधानाचार्य का तबादला हो गया था। इसके बाद से यह पद भी रिक्त पड़ा है। इसके अलावा हिंदी, राजनीतिक शास्त्र, इतिहास और शारीरिक शिक्षकों के पद लंबे अरसे से खाली पड़े हैं। अगले माह ड्राइंग शिक्षक भी सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं। मार्निंग एसेंबली से लेकर शारीरिक शिक्षा से संबंधित गतिविधियां एक डीपीई के सहारे चल रही हैं।
अभिभावकों ने सरकार और शिक्षा विभाग से मांग की है कि जल्द ही रिक्त पडे़ पदों को भरा जाए। बरशैणी पंचायत के प्रधान पूर्ण चंद ने बताया कि लंबे समय से स्कूल में अध्यापकों का टोटा पड़ा है। बच्चों बिना शिक्षकों के ही पढ़ाई करना पड़ रही है। उन्होंने बताया कि कई बार राज्य सरकार और शिक्षा महकमे को अवगत करवाया गया लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ। स्थानीय निवासी मोहर सिंह, ओम प्रकाश, हरीश और केशव ने कहा कि लंबे समय से शिक्षक न होने के कारण बच्चे संबंधित विषयों में पिछड़ते जा रहे हैं।

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