जलोड़ी दर्रे का हल नहीं तलाश पाई सरकारें

कुल्लू। जलोड़ी दर्रे को सालभर बहाल रखने का हल अभी तक किसी भी दल की सरकार नहीं तलाश पाई है। साल में छह माह तक जिला मुख्यालय से अलग-थलग रहने वाली बाह्य सराज की सवा लाख आबादी को अभी तक किसी दल की सरकार राहत नहीं दे पाई है। यहां के लोगों की प्रमुख मांग जलोड़ी दर्रा को सालभर बहाल रखना है। लेकिन सर्दियों में जहां बर्फबारी से यह क्षेत्र जिला मुख्यालय कुल्लू से कट जाता है वहीं बरसात में भूस्खलन के चलते आए दिन रास्ता बंद होने की समस्या झेलनी पड़ती है।
जिला मुख्यालय से जोड़ने वाले औट-लुहरी मार्ग को बरसाती मौसम में यातायात के लिए बहाल रखना लोनिवि के लिए भी कड़ी चुनौती होगी। हालांकि पूर्व की स्थितियों को भांप कर लोनिवि आनी और बंजार ने निपटने के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं, लेकिन पर्याप्त मशीनरी न होने से विभाग को खासी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
आने वाली बरसात में 10280 फुट ऊंचे जलोड़ी दर्रा से होकर गुजरने वाला औट – लुहरी मार्ग बंद होने से आनी-निरमंड के साथ किन्नौर, कुमारसेन, करसोग, छतरी तथा रामपुर के लोगों की चिंताएं बढ़ गई हैं। जिला मुख्यालय होने के नाते सबसे ज्यादा मुश्किल बाह्य सराज की 58 पंचायतों की सवा लाख आबादी होती है।
दर्रा बंद होने पर बाह्य सराज के लोगों को जान जोखिम में डाल कर दर्रा पैदल उतरना पड़ता है या फिर 300 किलोमीटर का लंबा सफर कर बाया शिमला-मंडी होकर कुल्लू जाना पड़ता है। बीती बरसात में भी औट-लुहरी मार्ग दो माह से अधिक समय तक यातायात के लिए बंद रहा था।
सरकार को जल्द करे समाधान
खनाग पंचायत के प्रधान मंगत राम कारदार, खनाग निवासी भागे राम राणा, फनौटी गांव के लाल चंद ठाकुर, पकरेड़ के तेजराम, करशाला के जगदीश ठाकुर, हीरा लाल, शेर सिंह और घुहाटन के टेक सिंह रॉकी ने कहा कि बरसाती मौसम में दर्रा को आरपार करना जोखिम भरा होता है। सरकार को जल्द ही इसका कोई ठोस विकल्प ढूंढना चाहिए।

लोनिवि तैनात करेगा मशीनरी
लोनिवि आनी के सहायक अभियंता आनी किशोरी लाल सुमन ने कहा कि बरसात के दिनों में भूस्खलन को देखते हुए विभाग कोटनाला और माशनूनाला के पास मशीनरी तैनात करने जा रहा है। लोनिवि बंजार के सहायक अभियंता रमेश शर्मा ने कहा कि विभाग बरसात से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है।

ये हैं अति संवेदनशील प्वाइंट
10281 फुट ऊंचे जलोड़ी दर्रा से होकर गुजरने वाले औट-लुहरी मार्ग के बीच पांच ऐसे प्वाइंट हैं जो भूस्खलन की दृष्टि से अति संवेदनशील है। इसमें कांडूगाड़, कोटनाला, माशनू नाला, बंजार के घियागी तथा लुहरी शामिल हैं। कांडूगाड़, कोटनाला तथा माशनू नाला के पास बार-बार मार्ग अवरुद्ध रहने से इलाके की खनाग, लझेरी, खणी, कोहिला तथा कमाद पंचायताें के सैकड़ों बागवानों का सेब भी इसी मार्ग से होकर मंडियों में पहुंचता है।

जिप बैठक में उठाऊंगी मुद्दा : चांद ठाकुर
कुंगस वार्ड से जिला परिषद सदस्य चांद ठाकुर ने कहा कि इस मुद्दे को जिप की बैठक में उठाया जाएगा। साथ ही सरकार के समक्ष भी इस समस्या का स्थाई हल तलाशने का आग्रह करेंगी।

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