
उत्तराखंड की त्रासदी से देश आहत, गम और गुस्से में है।
इस त्रासदी ने देश को कभी न भूलने वाला एक गहरा जख्म दिया है। मगर जितना जख्म कुदरत के कहर ने दिया है, उससे कहीं ज्यादा सियासत के दुकानदारों ने।
हादसे के पीड़ित हजारों लोग और उनके परिजन जिंदगी की दुआ मांग रहे हैं तो इधर देश के सियासतदान इस दुख के दरिया में भी डुबकी लगाकर वोट के मोती चुनने का एक भी मौका नहीं गंवा रहे।
