
शिमला। उत्तराखंड में प्रकृति के खौफ नाक कहर ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है, शिमला भी इससे अछूता नहीं है। राजधानी में काम करने वाले उत्तराखंड के लोग अपने परिजनों, रिश्तेदारों व दोस्तों का हालचाल जानने के लिए व्याकुल हैं। आपदा के बाद उत्तराखंड के कई क्षेत्र देश और दुनिया से कट गए हैं। संचार साधन ठप होने के कारण शिमला में रहने वाले लोग अपने करीबियों का कुशलक्षेम तक नहीं जान पा रहे। अपने इलाके का हालचाल अखबार, रेडियो और टेलीविजन के माध्यम से मिल पा रहा है।
लोअर बाजार के सोहन बूट हाउस में काम कर रहे अगस्त मुनि (रुद्र प्रयाग) के मोहन सिंह ने बताया कि उनके गांव के 25 लोग हादसे के बाद लापता हैं। इसमें उनके तीन भाई राकेश, दीपक और मुकेश भी शामिल हैं। तीनों के मोबाइल स्विच ऑफ हैं। उन्हाेंने बताया कि विपत्ति की इस घड़ी में घर जाना चाहता हूं, लेकिन सड़कें बंद हैं। मिडल बाजार की एक दुकान में काम करने वाले चमोली (बद्रीनाथ) के रहने वाले दीपक नेगी ने बताया कि गांव में खेत खलियान सब पानी में बह गए हैं। बचपन का दोस्त प्रकाश आपदा के बाद गायब है। घर में बात नहीं हो पा रही। दिवाली पर घर जाना था लेकिन जिस तरह सड़कें तहसनहस हुई हैं, उम्मीद नहीं है कि जाना संभव हो पाएगा।
शिमला के होटल बसंत में काम करने वाले रुद्रप्रयाग के भरत राणा को केदारनाथ में हुई घटना की जानकारी टीवी के माध्यम से मिली। भरत ने बताया कि उनका 23 वर्षीय साला पृथ्वीपाल केदारनाथ स्थित होटल में काम करता है। दुर्घटना के बाद उसका कोई पता नहीं है। परिवार वालों ने मान लिया है कि उसकी मौत हो चुकी है। हादसे के बाद अब घर जाना चाहता हूं, लेकिन रास्ते बंद हैं। इसी होटल में काम करने वाले जीत सिंह चोबता जागड़ी के रहने वाले हैं। पत्नी और 13 वर्षीय बेटी गांव में हैं। बहन का पति केदारनाथ में रहते हैं, जिनका कोई पता नहीं है। होटल की रिसेप्शन में लगे टीवी में आपदा की खबरें देखते रहते हैं। उम्मीद है शायद कोई सूचना मिल जाए।
परिजनों का हाल जानने में आ रही दिक्कत
केदारनाथ में आई प्राकृतिक आपदा के बाद शिमला में रह रहे उत्तराखंड के लोग व्याकुल हैं। परिजनों का हालचाल जानने में दिक्कत पेश आ रही है। प्रभावित लोगों की मदद के लिए स्थानीय स्तर पर प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। आपदा की इस घड़ी में प्रभावित लोगों की मदद के लिए चंदा जुटाने के अलावा आवश्यक सामग्री का बंदोबस्त करने के भी प्रयास किए जाएंगे।
– दिनेश चंद्र नौटियाल
अध्यक्ष, गढ़वाल सभा, शिमला
