साधना और तप की भूमि से खिलवाड़

हरिद्वार। ज्योर्ति एवं शारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि उत्तराखंड जैसी देवभूमि में हनीमून और पिकनिक मनाने पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। यह भूमि ज्ञान, साधना और तप की है। चप्पे-चप्पे पर रिसोर्ट बनाकर उत्तराखंड की मूल पृष्ठभूमि से खिलवाड़ किया जा रहा है। अब धर्मजगत ऐसा कदापि नहीं होने देगा।
कनखल स्थित मठ में वार्ता करते हुए जगद्गुरु शंकराचार्य ने कहा कि देवभूमि मंदिरों, मठों, पवित्र धामों और तीर्थों की भूमि है। इस देवभूमि पर पूजा, अर्चना और तपस्या का महत्व है। विश्वभर के श्रद्धालु के प्रति आस्था लेकर दूर-दूर से आते हैं। इस भूमि की रक्षा भी स्वयं भगवान करते आए हैं। दुर्भाग्य की बात है कि विगत सरकारों ने देवभूमि का विकास देवभूमि के रूप में नहीं, बल्कि पर्यटन क्षेत्र के रूप में किया जा रहा है। जगद्गुरु शंकराचार्य ने कहा कि सरकारों के कामकाज से भगवान भी नाराज हैं। जहां अध्यात्म के स्वर गूंजते रहे हैं और जहां अमर ग्रंथों की रचना हुई वहां यदि देवालयों के सामने हनीमून मनाया जाएगा, तो बर्बादी निश्चित होगी। शंकराचार्य ने देशवासियों से आग्रह किया कि वे आपदा की इस घड़ी में स्वयं सामने आएं और अपने हाथों से राहत सामग्री वितरित करें।
स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि उत्तराखंड में पीड़ित यात्रियों के साथ लूट और रेप की घटनाओं की भी जानकारी मिली है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है। राज्य सरकार का दायित्व है कि यात्रियों के सम्मान की रक्षा की जाए। उन्होेंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि वे सभी प्रभावित देवालयों की धुलाई दूध और गंगा जल से कराएं। विद्वान पंडितों के सानिध्य में अभिषेक कराकर विनाश लीला के पाप से मुक्ति पाने का प्रयत्न किया जाए।

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