
हल्द्वानी। मंडी समिति में सफाई व्यवस्था पर प्रतिमाह करीब डेढ़ लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं, इसके बावजूद मंडी परिसर में गंदगी के ढेर लगे हैं। जगह-जगह कूड़ा सड़ने से उठ रही सड़ांध से किसानों और व्यवसायियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कुमाऊं मंडल की सबसे बड़ी कृषि उत्पादन मंडी इस समय अव्यवस्थाओं से जूझ रही है। बरसात के पानी की निकासी की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। इसके कारण बरसात होने पर जलभराव की समस्या भी बनी रहती है। मंडी परिसर में पानी के निकासी के लिए नालियां तो बनी हैं, लेकिन इनकी सफाई की कोई व्यवस्था नहीं है। यही हाल मंडी परिसर की सफाई व्यवस्था का है। यहां पहले ठेके के सफाई कर्मियों से सफाई कराई जाती थी, मगर इस वित्तीय वर्ष से सफाई व्यवस्था को ठेके पर दे दिया गया है। अप्रैल में सफाई के लिए टेंडर किए गए थे, जिसमें सबसे कम रेट पर तिकोनिया के एक व्यक्ति को प्रतिमाह एक लाख 33 हजार राशि पर इसका ठेका दे दिया गया। बताते हैं कि कुछ समय तक तो सफाई व्यवस्था ठीक-ठाक चली, लेकिन अब व्यवस्था फिर बदहाल हो गई है। रविवार को हाल यह था कि मंडी परिसर में जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे थे तथा कूड़ा सड़ने की वजह से भीषण सड़ांध आ रही थी। मंडी परिसर में कूड़ा एकत्र करने के लिए जो केंद्र बने हैं, उनकी भी सफाई नहीं की जा रही है, वहां भी सड़ांध फैल रही है, जबकि गंदगी से कोई बीमारी ने फैले इसके लिए वहां प्रतिदिन कीटनाशक दवा का छिड़काव किया जाना चाहिए, जो कि नहीं हो रहा है। फल और सब्जियों के आढ़त की दुकानों के आसपास कूड़े की सड़ांध के कारण किसानों और व्यवसायियों को परेशानी हो रही है। मंडी समिति प्रशासन भी सफाई व्यवस्था को लेकर बेखबर बना हुआ है।
