
ऊना। अरबों रुपए के प्रस्तावित सेज (स्पेशल इकनोमिक जोन) पर कांग्रेस एकमत नहीं है। हाल ही में उद्योग मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने ऊना या कांगड़ा में सेज की स्थापना की बात कही थी। प्रदेश सरकार ने केंद्र से सेज मांगकर इसे यहां स्थापित करने का फैसला लिया है। अब सीपीएस एवं अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव राकेश कालिया ने सेज के विरोध की बात कहकर सियासी माहौल गरमा दिया है। कालिया ने तर्क दिया है कि दो दर्जन गांवों के हजारों लोगों के विस्थापन को देखते हुए सेज को गगरेट में मंजूरी नहीं दी जा सकती।
उद्योग मंत्री पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि सेज की स्थापना ऊना या कांगड़ा में की जाएगी। सेज के मसले पर ऊना में कांग्रेस के भीतर उभरे मतभेदों को देखते हुए अरबों रुपये की यह योजना ऊना के हाथों से फिसल सकती है। कांगड़ा में भी इसका विरोध होता है तो हिमाचल प्रदेश को सेज से हाथ धोना पड़ेगा। सेज का वर्ष 2008 में भी भारी विरोध हुआ था। अक्तूबर 2012 में भी विधानसभा चुनाव के ऐन मौके पर सेज के विरोध में आवाज उठी। 2008 में सेज का विरोध करने वाले हिमालय नीति अभियान के संयोजक गुमान सिंह का तर्क है कि भाखड़ा और पौंग विस्थापितों के जख्म आज भी हरे हैं। गगरेट में सेज की स्थापना से 26 गांवों के करीब 80 हजार लोग विस्थापित होंगे।
कालिया ने विरोध की बात नहीं कही : धर्माणी
कांग्रेस के जिलाध्यक्ष वीरेंद्र धर्माणी कहते हैं कि कांग्रेस के भीतर सेज की स्थापना को लेकर कोई मतभेद नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि राकेश कालिया ने सेज के विरोध की बात नहीं कही है। कालिया ने यह कहा है कि सेज की स्थापना होगी लेकिन गांव विस्थापित नहीं होंगे। कांग्रेस ने पहले भी सेज के लिए जो भूमि चिह्नित की थी, वह गैर कृषि योग्य भूमि थी।
कांग्रेस की कथनी और करनी में अंतर : बग्गा
भाजपा के जिलाध्यक्ष बलवीर बग्गा कहते हैं कि कांग्रेस की कथनी और करनी में अंतर है। जब भाजपा सेज की स्थापना कर रही थी तब कांग्रेस ने विरोध किया। अब कांग्रेस के मंत्री और विधायक ही सेज पर एकमत नहीं हैं।
लोगों के हितों से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं : दुबे
बसपा के जिला उपाध्यक्ष शैलेष दुबे कहते हैं कि ऊना में बड़ी योजनाओं का बसपा विरोध नहीं करती है लेकिन लोगों के हितों से खिलवाड़ को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
