
भल्याणी (कुल्लू)। टीडी (टिंबर डिस्ट्रीब्यूशन) पर लगा प्रतिबंध लोगों पर भारी पड़ गया है। लकड़ी न मिलने से सैकड़ों लोगों का घर बनाने का काम अधर में लटका पड़ा है। यहां तक कि इंद्रा आवास योजना के तहत निर्माणाधीन मकान भी सड़ने की कगार पर हैं। आगजनी की घटना के लिए अति संवेदनशील मानी जाने वाली कुल्लू घाटी में सालाना दर्जनों घर आग की भेंट चढ़ते आए हैं। लिहाजा, पीड़ित परिवारों को मजबूरन तंबुओं में गुजर-बसर करना पड़ी रही है। 1896 फारेस्ट सेटलमेंट रिपोर्ट के तहत कृषि योग्य भूमि के मालिक को टीडी का अधिकार प्राप्त था। लेकिन गत वर्ष 1896 के तहत मिले नागरिकों के हक-हकूकों को बदल दिया गया। टीडी के अधिकार को प्रतिबंधित कर दिया है। ऐसे में बीते कई सालों से पहाड़ी इलाकों के लोग अपने घर नहीं बनवा पा रहे हैं।
केहर चंद तथा नील चंद बताते हैं कि उन्हें इंद्रा आवास योजना के तहत आवास निर्माण हेतु सरकार की तरफ धन मिला है, लेकिन इमारती लकड़ी न मिलने से मकानों का काम पूरा नहीं हो पाया है। चेत राम तथा निहाल चंद ने बताया कि दो साल पूर्व उनके गांव में हुई आगजनी की घटना में उनका बसेरा जल गया था। सरकार ने राहत राशि तो दी, लेकिन लकड़ी के अभाव में मकान बनाना मुश्किल हो गया है। वन विभाग के शिमला में तैनात अतिरिक्त मुख्य अरण्यपाल डीपी सिन्हा ने बताया कि विभाग 2010 की पालिसी पर प्रस्ताव तैयार कर रहा है।
बहाल करवाए था लोगों का अधिकार
मंत्री पद पर रहते हुए उन्होंने प्रतिबंधित टीडी के हक को लोगों की सुविधा के लिए बहाल कर दिया था। कांग्रेस शासन में जनता को टीडी मिल रही है या नहीं, उन्हें इस बारे जानकारी नहीं है।
खीमीराम शर्मा पूर्व वन मंत्री
कमेटी का किया है गठन
वीरभद्र सरकार ने टीडी बहाली को लेकर एक कमेटी का गठन किया है। कमेटी ने 2010 की पालिसी पर मुहर लगाने की सिफारिश की है। आचार संहिता के चलते प्रक्रिया रुकी पड़ी है। चुनाव निपटते ही लोगाें को टीडी मिलना शुरू हो जाएगी।
ठाकुर सिंह भरमौरी वन मंत्री हिमाचल प्रदेश
