
काईस (कुल्लू)। मणिकर्ण घाटी के चौहकी और बलाधी के बीच स्थित मलाणा खड्ड पर बना पैदल सूहणी पुल जर्जर हालत में है। पुल की दोनों तरफ की रेलिंग टूट चुकी है। इससे अक्सर हादसे की आशंका रहती है। लेकिन खड्ड को पार करने का दूसरा कोई विकल्प न होने से ग्रामीण जान जोखिम में डालकर यहां से गुजरने को मजबूर हैं।
लोगों का आरोप है कि वे कई बार प्रशासन और सरकार को अवगत करवा चुके हैं लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ। पुल को लेकर कई बार सरकारी तौर पर घोषणाएं भी हुईं लेकिन नेताओं से सिर्फ आश्वासन ही मिले। देवी भागासिद्ध के कारदार थैलू राम ने कहा कि उझी घाटी के आधा दर्जन देवी-देवता भी मणिकर्ण के लिए अपनी तीर्थ यात्रा के लिए जाते हैं।
पुल के नए सिरे से न बनने पर देव समाज के लोगों में रोष है। इस पुल से जुड़े गांव बलाधी, पोहल तथा बाउतड़ गांव हैं। तलपीणी पंचायत के उपप्रधान मोहर सिंह ठाकुर, वार्ड सदस्य पिंकी देवी, बाला राम, नौमी राम, नौला राम, देवकी देवी, सोहन लाल, पूर्ण चन्द, दोत राम, सुरजू, मान चंद, महेंद्र सिंह, राजू तथा अन्य लोगों ने कहा कि चुनावी बेला पर राजनीतिक दलों के नेताओं को गांव की याद आती है और यहां पहुंचकर दर्जनों वायदे करके चले जाते हैं। लेकिन चुनाव निपटते ही नेताओं के दर्शन दुर्लभ हो जाते हैं। पंचायत की ओर से कई बार सरकार और प्रशासन से पुल निर्माण की मांग की जा चुकी है लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ। ग्रामीणों तथा पंचायत प्रतिनिधियों ने सरकार तथा प्रशासन से पुल को नए सिरे से बनाने की मांग की है । जिला परिषद बरशैणी वार्ड के सदस्य ओम प्रकाश शर्मा ने बताया कि पुल के निर्माण के लिए सरकार से पत्राचार किया है। डीसी शरभ नेगी ने बताया कि इस तरह की शिकायत प्रशासन को नहीं मिली है। लेकिन अगर ऐसा है तो संबंधित विभाग को रिपेयर करने के निर्देश दिए जाएंगे।
