
नई दिल्ली। अपनी मेहनत के बूते 12वीं में अच्छे अंक लाकर दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेजों में सीट पक्की करना जितना आसान और सस्ता है, वहीं हॉस्टल की सीट पक्की करने से लेकर उसकी फीस चुकाना उतना ही महंगा। कॉलेज की फीस जहां आठ से बारह हजार रुपये तक है, वहीं हॉस्टल की फीस लगभग 48 हजार रुपये तक है।
डीयू में लगभग 70 कॉलेज हैं, जिसमें मार्निंग, ईवनिंग, कैंपस कॉलेज, आउट ऑफ कैंपस और गर्ल्स कॉलेज शामिल हैं। इन सब में से सिर्फ 14 कॉलेजों में ही हॉस्टल की सुविधा है। इन कॉलेजों की वार्षिक फीस अलग-अलग है। यह फीस सिर्फ कॉलेजों के नाम और सुविधाओं के मुताबिक ही नहीं, बल्कि अलग-अलग कोर्स के लिहाज से भी तय की जाती है। सुविधाओं के नाम पर यह फीस और बढ़ जाती है।
मिरांडा हाउस में जहां कोर्स की फीस 8,780 से लेकर 12,920 रुपये तक है, वहीं हॉस्टल फीस के लिए 27,190 रुपये चुकाने होते हैं। दूसरी किश्त 21,750 रुपये की दिसंबर तक चुकानी होती है। इस तरह से हॉस्टल की सालाना फीस 48,940 रुपये है। वहीं, दौलत राम कॉलेज में कोर्स के मुताबिक फीस 6,640 से लेकर 8,420 रुपये है, जबकि यहां हॉस्टल की बात की जाए तो वह एसी रूम के लिए प्रति बेड के हिसाब से 500 रुपये प्रति दिन है। यानी तीन महीने भी छात्राएं हॉस्टल रूम का इस्तेमाल करती हैं तो फीस का खर्च लगभग 45,000 हो जाता है। वहीं, वेंकटेशवर कॉलेज की बात करें तो यह फीस 28,790 रुपये है। अपनी बेटी के लिए दाखिले के लिए पहुंचे शैलेष अग्निहोत्री ने कहा कि फीस के साथ-साथ हॉस्टल की मार भी झेलनी पड़ेगी। अगर हॉस्टल में सीट नहीं मिलेगी तो पेइंग गेस्ट (पीजी) या प्राइवेट हॉस्टल में रहने को मजबूर होना होगा। जहां का खर्चा जेब पर और भारी बढ़ जाएगा।
