लापरवाह है देहरादून नगर निगम और सरकार !

राजधानी में ड्रेनेज सिस्टम कौन बनाएगा। ड्रेनेज सिस्टम कब तक बन पाएगा, जिससे शहर के लोगों को बरसात में जलभराव से राहत मिलेगी। इसका जवाब किसी के पास नहीं है। पिछले पांच साल पहले ड्रेनेज का मास्टर प्लान बनकर तैयार हो गया था, लेकिन मास्टर प्लान बनाने वाले कंसलटेंट का आज तक शुल्क ही नहीं भुगतान किया गया।

अवैध कब्जे हुए
ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि ड्रेनेज सिस्टम को लेकर सरकारी मशीनरी कितनी गंभीर है। शहर की आबादी लगातार बढ़ती जा रही है। खाली जमीन पर बेतरतीब निर्माण होते जा रहे हैं। नाले खालों पर अवैध कब्जे हो चुके हैं। छोटी-छोटी लियां बनाकर लोक निर्माण विभाग, एमडीडीए और नगर निगम के अधिकारी अपने कर्तव्यों की इतिश्री समझ ले रहे हैं, लेकिन शहर के लिए ड्रेनेज सिस्टम कैसे बने।

इसको लेकर प्रदेश सरकार से लेकर नगर निगम तक को चिंता नहीं है। ऐसी स्थिति में मामूली बारिश में भी शहर पानी-पानी हो जाता है। इसका खामियाजा शहर के लोगों को भुगतना पड़ रहा है। पार्षदों से लेकर विधायकों तक केवल सड़क बनाने तक सीमित रहते हैं। कोई भी नेता ड्रेनेज सिस्टम की बात नहीं करता।

नहरों को अंडरग्राउंड करने से बढ़ी मुसीबत
राजधानी में नहरों को अंडर ग्राउंड करने से भी मुसीबतें बढ़ गई हैं। आठ साल पहले तक पूरे शहर में नहरों का जाल था। ईसी रोड, रायपुर, पथरीबाग, जीएमस रोड, माता मंदिर रोड, सहित विभिन्न क्षेत्रों से नहरें गुजरती थीं, लेकिन लोक निर्माण विभाग ने सड़कों को चौड़ी करने के लिए नहरों को अंडर ग्राउंड कर दिया। इससे बारिश का पानी निकलने में दिक्कतें हो रही हैं और यही तबाही का कारण बन रहा है।

अवैध प्लाटिंग ने बढ़ाई परेशानी
राजधानी में बड़े पैमाने पर हो रही अवैध प्लाटिंग से भी जलभराव की समस्या बढ़ती जा रही है। शहर में लगभग 300 से अधिक अवैध प्लाटिंग करके कालोनियां बसाई गई हैं, जिसके लिए न तो ड्रेनेज सिस्टम है और न ही मानकों के अनुसार चौड़ी सड़कें। पानी निकासी को लेकर भी उचित प्रावधान नहीं किया गया है।

ड्रेनेज सिस्टम को ठीक करना किसी एक महकमे के बस की बात नहीं है। इसके लिए प्रदेश सरकार को उचित कदम उठाना होगा। शहर में ड्रेनेज सिस्टम बनाने के लिए लगभग 300 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। 2014 में शुरू होने वाले जेएनएनएयूआरएम फेज-2 में इसके लिए बजट स्वीकृत कराने की कोशिश की जाएगी।
– विनोद चमोली, मेयर

अवैध प्लाटिंग आज कोई नई बात नहीं है। पहले से ही हो रही है। नये मामले में कार्रवाई की जा रही है। जलभराव को दूर करने के लिए जब तक पूरे शहर के लिए ड्रेनेज सिस्टम नहीं बनेगा, तब तक समाधान संभव नहीं है।
– आर मीनाक्षी सुंदरम, वीसी एमडीडीए

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