विज्ञापनों तक सिमटे बेहतर सुविधा के दावे

भल्याणी (कुल्लू)। सूबे में आने वाली सरकारें विज्ञापनों के माध्यम से और राजनीतिक मंचों से अपने नागरिकों को देश-दुनिया से बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करवाने और स्वास्थ्य क्षेत्र में अव्वल रहने का दम भरते नहीं थकतीं, लेकिन धरातल पर वास्तविकता कुछ और ही है। कान-नाक और गला दर्द की दवा तो दूर स्वास्थ्य विभाग की ओर से संचालित स्वास्थ्य उपकेंद्रों में सर्दी-जुकाम की दवा भी नहीं मिलती है। ऐसे में सरकार की ओर से संचालित ये सेंटर सफेद हाथी बन कर रह गए हैं। इन उपकेंद्रों में दवाओं का टोटा होने के चलते मरीजों को निराश होकर लौटना पड़ता है। लोगों ने सरकार को चेताया है है कि या तो इन उपकेंद्रों को दवा भेजें अन्यथा मजबूरन ग्रामीण इन उपकेंद्रों पर ताला जड़ देंगे।
इन उपकेंद्रों में अममून दवाइयों की किल्लत रहती है। जिला भर में स्वास्थ्य विभाग की और ग्रामीण क्षेत्रों में 100 स्वास्थ्य उप सेंटर खोले गए हैं। इन केंद्रों को संचालित करने के मकसद से सरकार ने करोड़ों खर्च कर आलीशान भवन तो खड़े कर रखें हैं लेकिन यह सफेद हाथी साबित हो गए हैं। मणिकर्ण निवास जगमोहन सिंह ठाकुर, उझी के बारी निवासी प्रेम सिंह, लगघाटी के गुरदयाल सिंह, बुद्धि सिंह, चंदे राम, खराहल के नीरत राम, बंजार खावल के हीरा सिंह, आनी के चमन लाल, हिम्मत सिंह और यशपाल ने बताया कि जब भी वे अस्वस्थ होने पर इन उपकेंद्रों में दवा के लिए जाते हैं तो उन्हें अकसर यहां से निराश होकर लौटता पड़ता है। लगघाटी के वरिष्ठ नागरिक बाला राम ठाकुर बताते है कि ग्रामीण मंडी लोकसभा के उपचुनावों में तो नहीं भविष्य में होने वाले आम चुनावों में प्रदेश के दोनों प्रमुख दलों का बहिष्कार करने पर विचार कर रहे हैं। उधर इस संदर्भ में जिला स्वास्थ्य अधिकारी डा. सुशील चंद्र का कहना है कि उपकेंद्रों का मकसद मरीजों का इलाज करना नहीं।े बल्कि बच्चों का टीकाकरण करना, गर्भवती महिलाआें का टीकाकरण, पल्स पोलिया ड्राप्स पिलाना तथा लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना है।

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