बह गए दावे, बची है बस बदइंतजामी

शिमला। बारिश की तेज धार शहर पर मार की तरह पड़ी है। तीन दिन से हो रही बारिश में सरकारी दावे बह गए। पीछे बची है, तो बस बदइंतजामी। ट्रैफिक के लिए बनी सड़कें मलबे, पानी और पत्थरों के हवाले हो चुकी हैं। रास्तों और सड़कों पर पहाड़ियों से पत्थर गिर रहे हैं। डंगे भी जवाब दे रहे हैं। इससे घंटों ट्रैफिक जाम लग रहा है। कई बस्तियों में मकानों को खतरा हो गया है। लोग घर छोड़कर सुरक्षित स्थान ढूंढ रहे हैं। पेयजल योजनाओं में गाद भर गई है। कई इलाकों में पीने का पानी तक नसीब नहीं हो रहा। शनिवार को मौके पर जाकर ‘अमर उजाला’ टीम ने हालात का जायजा लिया।
कृष्णानगर फिर दरकने लगा है। शुक्रवार रात और शनिवार तड़के दो डंगे गिरने से तीन मकानों में बड़ी-बड़ी दरारें आ गई हैं। प्रभावित परिवारों ने असुरक्षित मकानों को खाली कर दूसरी जगह किराये पर मकान ले लिए हैं। एक परिवार ने पड़ोसियों के पास पनाह ली है। कार्ट रोड से सटे कृष्णानगर में लव-कुश चौक से नीचे पानी की निकासी की सही व्यवस्था नहीं है। सड़कों की मरम्मत न होने और बंद नालों से पानी जमीन में रिस रहा है। यहां जमीन भी खिसक रही है। स्थानीय ओमप्रकाश के परिवार में चार सदस्य हैं। पत्नी निशा ने बताया कि शनिवार सुबह करीब साढ़े सात बजे मकान के आगे डंगा गिर गया, जिससे मकान में दरारें पड़ गई हैं। मकान अब कभी भी गिर सकता है। उन्होंने शनिवार को ही पड़ोस में एक कमरा किराये पर लेकर सामान शिफ्ट किया है। किरण देवी के मकान में भी दरारें हैं। रसोई और कमरे की दीवारें कभी भी गिर सकती हैं। किरण के बेटे अनिल ने बताया कि उन्होंने पड़ोसियों के घर पर सामान रखा है। सूरत राम के मकान के आगे से जमीन खिसक गई है, जिससे इनके मकान का एक हिस्सा ढह गया है।

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