
दिल्ली: भारत के ओल्डी बेग क्षेत्र में चीनी सैनिकों द्वारा घुसपैठ करने और चीन के बार-बार घुसपैठ करने की हरकत का क्या कोई ठोस हल निकलेगा। लिहाजा भारत सरकार की ओर से इसके लिए चीन से बाचतीच भी की है, लेकिन अभी तक चीन की ओर से कोई जवाब नहीं आया है।
सीमा रक्षा सहयोग समझौते के मसौदे पर भारत के सुझावों पर चीन ने अभी तक अपना उत्तर भारत को नहीं सौंपा है। लद्दाख क्षेत्र में चीनी सैनिकों के अतिक्रमण से पहले मार्च महीने में बीजिंग ने समझौते का प्रस्ताव किया था।
चीन के रक्षा मंत्री जनरल लियांग गुआंगलीए ने पिछले वर्ष सितंबर महीने में भारत यात्रा के दौरान सीमा रक्षा सहयोग समझौता (बीडीसीए) का प्रस्ताव रखा था। नई दिल्ली को बीडीसीए पर 10 मई को दिए गए अपने सुझाव पर बीजिंग की राय का इंतजार है।
बीजिंग ने यह मुद्दा भारत के तत्कालीन रक्षा सचिव शशिकांत शर्मा की इस वर्ष जनवरी में हुई यात्रा के दौरान उठाया था। चीन ने मार्च महीने में नई दिल्ली में आयोजित दोनों देशों के बीच रक्षा सचिव स्तर की वार्ता के दौरान प्रस्तावित समझौते का मसौदा भारत को अग्रसारित किया।
भारत ने चीन के प्रधानमंत्री ली केकियांग की यात्रा से पहले 10 मई को ‘प्रत्युत्तर मसौदा’ सौंपा। एक विश्वस्त सूत्र ने बताया कि अभी तक इस पर कोई उत्तर नहीं मिला है।
भारत और चीन के बीच 4000 किलोमीटर से भी ज्यादा लंबी वास्तविक नियंत्रिण रेखा (एलएसी) पर शांति और अक्षोभ की स्थिति बनाए रखने के लिए समझौते का प्रस्ताव किया गया है। दोनों देशों के बीच सीमा तय नहीं है और एलएसी को असल में सीमा मानी जा रही है।
