नोटों से भरा है यूरोपियन सलाद

खराहल (कुल्लू)। कुल्लू-मनाली में पहुंच रहे सैलानी यूरोपियन सलाद के मुरीद हो गए हैं। पांच सितारा होटलों और रेस्तरां में पर्यटक देशी सलाद को काफी पसंद कर रहे हैं। जिला में यूरोपियन सलाद की सैकड़ों बीघा भूमि पर खेती हो रही है। यहां की आबोहवा यूरोपियन सलाद के अनुकूल है। यूरोपियन सलाद की दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चंडीगढ़ जैसे बड़े शहरों के अलावा हिल स्टेशनों के होटलों में इसकी काफी मांग है। कुल्लू-मनाली के होटलों तथा रेस्तरां में भी यूरोपियन सलाद की मांग अधिक है। इसके अलावा ब्राकली, ब्रेसल, पलेरी, रेड कैवेज और टमाटर चेरी की पैदावार भी हो रही है। सेऊबाग, गाहर, हुरला, सरसेई और बंदरोल आदि इलाकों में किसान इन सब्जियों के साथ यूरोपियन सलाद उगाकर मोटी कमाई कर रहे हैं। घाटी के किसान कमल किशोर, रमेश, सुरेश और संजय ने कहा कि एक बीघा भूमि में 35 हजार रुपये की कमाई एक सीजन में हो जाती है। एक पौधे के सलाद का कटान तीन बार बार किया जाता है।
कृषि विभाग के उपनिदेशक बीएल शर्मा ने कहा कि यूरोपियन सलाद और अन्य विदेशी सब्जियों के लिए यहां की जलवायु अनुकूल है। जिले में सैकड़ों बीघा भूमि पर इसकी खेती की जा रही है। किसानों को इन सब्जियों से अच्छी आमदनी हो रही है। होटलियर एसोसिएशन मनाली के पूर्व अध्यक्ष गजेंद्र ठाकुर ने कहा कि हाई प्रोफाइल सैलानी यूरोपियन सलाद की मांग करते हैं। पहले होटलियर बाहर से यह सलाद मंगवाते थे लेकिन अब यह यहीं उपलब्ध होने लगा है।

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