खुफिया जानकारी के लिए अमेरिका में बनेगा कानून

खुफिया जानकारी के लिए अमेरिका में बनेगा कानून

वाशिंगटन: अमेरिका में अति गोपनीय प्रिज्म कार्यक्रम से जुडी जानकारियां लीक हो जाने के बाद अमेरिकी संसद ऐसे कानून बनाने पर विचार कर रही है जिनके तहत एनएसए के साथ कई गोपनीय सूचनाओं तक राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी(एनएसए) के कान्ट्रेक्टरों की पहुंच नहीं होगी।

अमेरिकी संसद के ऊपरी सदन(सीनेट)की खुफिया मामलों की समिति की प्रमुख डाएन फेस्टीन ने कल कहा, ‘हम यकीनन ऐसा कानून बनाएंगे जिससे कान्ट्रेक्टरों की अति गोपनीय जानकारियों तक पहुंच सीमित हो जाए। इसमें कई दूसरी चीजें भी होंगी।’ फेस्टीन ने यह भी बताया कि एनएसए निदेशक कीथ अलेक्सान्द्र ने उन सभी आतंकवादी वारदातों की सूची सार्वजनिक करने की बात कही है जिनकी रोकथाम प्रिज्म कार्यक्रम की वजह से संभव हो पाई।

अलेक्सान्द्र ने बुधवार को संसद को बताया था कि प्रिज्म कार्यक्रम की वजह से ही बीसियों आतंकवादी हमलों को समय रहते रोक पाना संभव हो पाया। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा भी इस कार्यक्रम के प्रकाश में आने के बाद कह चुके थे कि इसका मकसद अमेरिकी नागरिकों की जानकारियां बटोरना नहीं था बल्कि इसका लक्ष्य देश को आंतकवादी घटनाओं से बचाना था।

उल्लेखनीय है कि ब्रिटेन के गार्डियन दैनिक ने कुछ दिनों पहले खुलासा किया था एनएसए के लिए काम करने वाली निजी कंपनी बूज एलन के कर्मचारी एडवर्ड स्नोडेन ने ही दरअसल इस मामले का भंडाफोड़ किया था। स्नोडेन का कहना था कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के कामकाज के तरीकों से उनका मोह भंग हो गया था और उन्होंने लोकतंत्र की रक्षा के लिए ये सूचनाएं लीक करने का कदम उठाया। स्नोडेन फ्लिहाल हांगकांग में रह रहे हैं।

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