
खराहल (कुल्लू)। लहसुन के दाम लुढ़कने से जिला के किसान खासे चिंतित हैं। किसानों ने इस बार लहसुन की खेती का दायरा भी बढ़ाया था। गत वर्ष लहसुन की खेती 850 हेक्टेयर भूमि पर की गई थी लेकिन इस वर्ष 1200 हेक्टेयर भूमि पर लहसुन की खेती की गई।
शुरुआती दौर में लहसुन का मूल्य 45-50 रुपये प्रति किलो के हिसाब से मंडियों में बिक रहा था लेकिन मंगलवार से एकाएक दाम गिरना शुरू हो गए। इस समय ए श्रेणी का लहसुन 30 से 35 रुपये प्रतिकिलो के हिसाब से बिक रहा। दाम कम होने लहसुन उत्पादक असमंजस में हैं। किसानों का कहना है कि अच्छे दाम न मिलने से बीज, खाद और मजदूरों का खर्चा भी पूरा नहीं हो रहा है। लहसुन का बीज 60 रुपये प्रति किलो के हिसाब से खरीदकर खेती की दी थी।
किसानों ने दाम गिरने से लहसुन की खेप को मंडियों में भेजना बंद कर दिया है। घाटी के किसान अनीश, नितिन, संजीव, रामनाथ, महेंद्र सिंह, देवेंद्र, राजकुमार, कर्मचंद और कमलेश ने कहा कि दाम एकाएक लुढ़कने से किसान चिंतित हैं। कृषकों का कहना है कि आढ़तियों के एजेंट मनमाने ढंग से लहसुन खरीदकर किसानों को चपत लगा रहे हैं। किसी भी आढ़ती का रेट एक सामान नहीं है। ऐसे में कृषक आर्थिकी मिली भगती का संदेह जाहिर कर रहे हैं। किसानों ने सरकार से मांग की है कि राष्ट्रीय बागवानी के तहत किसानों से लहसुन की खरीद फरोख्त की जाए। लहसुन के विख्यात विक्रेता प्रसून शर्मा, बंदरोल मंडी के आढ़ती राजेश कुमार ने बताया कि कई किसानों का लहसुन सड़ने की शिकायत आई है। इस कारण मंडियों में कीमत में गिरावट आई है।
