श्रीसंत समेत दस की जमानत याचिका पर बहस

नई दिल्ली। आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग में फंसे श्रीसंत, अंकित चव्हाण समेत दस आरोपियों ने स्वयं को निर्दोष बताते हुए उन पर लगाए मकोका को गलत ठहराया है। उन्होंने तर्क रखा कि महाराष्ट्र सरकार ने संगीन अपराधों व गैंगवार जैसे जुर्म पर काबू करने के लिए मकोका कानून बनाया है न कि धोखाधड़ी व जुए के अपराध को इसमें शामिल करने के लिए। वहीं अभियोजन पक्ष ने जमानत पर आपत्ति जताते हुए कहा आईपीएल फिक्सिंग के पूरे मामले को सिंडीकेट ऑपरेट कर रहा है। इसके हैंडलर विदेश में बैठे हैं। ये सभी लोग अंडरवर्ल्ड से हैं।
वेकेशन जज वीके खन्ना के समक्ष श्रीसंत, अंकित चव्हाण, मनन भट्ट, चंद्रेश पटेल, जीजू जनार्दन, सुनील सक्सेना, मोहम्मद याहिया, सैयद दुरेज अहमद, रमाकांत व दीपित गर्ग की जमानत याचिका पर बहस हुई।
पुलिस की ओर से बहस शुरू करते हुए विशेष अभियोजन अधिकारी राजीव मोहन ने इन आरोपियों पर मकोका लगाने के संदर्भ में विशेष अधिनियिम के प्रावधानों के बारे में अदालत को बताया। लेकिन बचाव पक्ष ने इसका विरोध करते हुए उन्हें सीधे आईपीएल मामले में आरोपियों की भूमिका के तथ्यों का खुलासा करने के लिए कहा।
जज वीके खन्ना ने अभियोजन व बचाव पक्ष के बीच बहस को खत्म करते हुए बचाव पक्ष को आरोपियों की जमानत याचिका पर अपने तर्क पेश करने के लिए कहा। श्रीसंत समेत कई आरोपियों की ओर बहस करने वाले वकीलों ने आईपीएल मामले में मकोका लगाने को गलत बताया। उनका तर्क था कि महाराष्ट्र सरकार ने संगीन अपराधों व गैंगवार जैसे जुर्म पर काबू करने के लिए कानून बनाया न कि धोखाधड़ी व जुए के अपराध को इसमें शामिल करने के लिए, इसलिए आईपीएल मामले में मकोका लगाना गलत है।

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