
नई दिल्ली। दिल्ली के उपराज्यपाल ने एक आदेश से विधानसभा के 19 कर्मचारी व अधिकारियों का ट्रांसफर किया, लेकिन स्पीकर ने मुख्य सचिव को फटकारा और बजट पास नहीं होने का हवाला देकर बदलवा दिया। मामला 2000 का है जब स्पीकर चौधरी प्रेम सिंह थे। काम करने में बार-बार दिक्कत पैदा करने वाले अपने सचिव से मुख्यमंत्री ने घास छीलने के लिए खुरपा मांग लिया। ऐसे कई रोचक व अनछुए पहलू को उजागर करने वाली किताब विधानसभा के पूर्व सचिव सुदर्शन कुमार शर्मा ने लिखी है। विधायिका, सरकार और मतदाता नाम की इस पुस्तक का लोकार्पण मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने मंगलवार को किया। किताब में ऐसी कई बातें लिखी गई हैं जो बंद कमरे में हुईं। लेखक सुदर्शन कुमार शर्मा 1993 में पहली विधानसभा के बाद आठ साल सचिव रहे। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. योगानंद शास्त्री, पूर्व अध्यक्ष चौधरी प्रेम सिंह ने भी किताब के विषय में विचार रखे। मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने कहा है कि लेखक ने दिल्ली की नई विधानसभा के लिए नियम कायदे बनाने के साथ प्रशासनिक ढांचे का अध्ययन करके सुझाव भी दिये हैं। लेखक सुदर्शन कुमार शर्मा ने कहा कि स्मृति में जो कुछ था उसे लिखा है। उन्होंने किताब में चार विधायकों को अच्छा शिष्य बताया है। बाद में वे सर्वश्रेष्ठ विधायक भी चुने गए।
