
आनी (कुल्लू)। यहां के ब्राह्मण बहुल गांव में आज भी पौराणिक बी माता का पर्व बडे़ हर्षोंल्लास के साथ मनाया जाता है। सोलह दिन तक चले इस पर्व को यहां की सुहागिन महिलाएं पारंपरिक रीतिरिवाजों से इसका निर्वहन करती हैं। सोलह दिन से माता की पूजा कर सोमवार को इसे जलाशय के पास विसर्जन कर दिया गया। माताओं के पर्व में माता की द्रुव से विशेष पूजा अर्चना की जाती है। धनधान्य और सुहागिनाें के वंश वृद्धि करने वाले इस पर्व को आज भी प्राचीनकाल से ग्रामीण महिलाएं संजोए हुए हैं। क्षेत्र के पंडित ब्रह्मानंद शर्मा और चंद्र प्रकाश के अनुसार शास्त्रोक्त सोलह माताओं की पूजा अर्चना कर अपार सौभाग्य फल मिलता है।
आनी के जलोड़ी बटाला, शमेशा, ठोगी, कराणा, रोपा, ओल्वा, रिवाडी, नित्थर के बश्ला, देगश, केबनी, धनाह सहित निरमंड के ब्राह्मण बहुल गांव में बी माता का पर्व सोलह दिन तक धूमधाम से मनाया गया। 16वें दिन इस पर्व का विसर्जन गांव की सुहागिनों ने प्राकृतिक जलाश्य के पास पौराणिक विधि अनुसार किया। आदिकाल से इस पर्व को मनाने की परंपरा आज भी कायम है। इसमें सोलह माताओं का आह्वान कर पूजा अर्चना की जाती है। विसर्जन करने के पश्चात आटे के लड्डू बनाकर बांटना इस पर्व की मर्यादा है, जिसे सभी लोगों में बांटा जाता है।
