
भल्याणी (कुल्लू)। फल-फूलों की घाटी कुल्लू का निचला क्षेत्र इन दिनों सूखे की जद में आ गया है। तेज धूप से जमीन में नमी की भारी कमी हो गई है। ऐसे में घाटी के रसीले सेब के पौधे कुमलाने लगे हैं। बागवानी विभाग के मुताबिक अगर एक हफ्ते के भीतर इंद्रदेव मेहरबान नहीं हुए तो जिले की लोअर बेल्ट में सैकड़ों पौधे सूखे की जद में आने से मर जाएंगे। गरमी की तपिश से बागवानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच रही हैं।
जिला कुल्लू में इस बार सेब की बंपर फसल है। बागवानी विभाग ने इस वर्ष 2.24 लाख मीट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य रखा है। बावजूद इसके बागवानों में मायूसी है। जिला में 23 हजार हेक्टेयर भूमि पर बागान लहलहा रहे हैं। इस भूमि में 69 लाख सेब के फलदार पौधे रोपे हैं। लेकिन बारिश न होने से यह पौधे भी मुरझाने लगे हैं। बागवानी विभाग के उपनिदेशक डा. बीएस राणा ने इसकी पुष्टि की है। खराहल घाटी के निरत राम, गाड़ागुशैणी के हिरदे राम, आनी के कमल ठाकुर, लाल चंद, तेज राम ठाकुर, बढ़ाई के मान चंद ठाकुर, शीशामाटी के राम लाल और मनोहर लाल ने बताया कि सूखे से उनके सेब की पौध सूखने लगी है।
मौहल स्थित पर्यावरण संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. एसएस सावंत ने बताया कि ग्लोबल वार्मिंग के चलते यह स्थिति बनी है। डा. सावंत ने बागवानों को सेब के बगीचों की सिंचाई करने सलाह दी है। गरमी और सूखे के चलते जमीन में नमी की भारी कमी आई है। कहा कि जहां सिंचाई की सुविधा है वहां तुरंत सिंचाई करनी चाहिए। जहां सिंचाई की सुविधा नहीं वहां बागवान पौधों के तौलियों को घास तथा कूड़े-कचरे से ढकें। ऐसे में जमीन में नमी बनी रहेगी।
